जाने-माने अर्थशास्त्री नीलकंठ मिश्रा को अमेरिका में विश्व बैंक का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार की कैबिनेट नियुक्ति समिति (एसीसी) ने गुरुवार को इस महत्वपूर्ण फैसले पर अपनी मुहर लगा दी। नीलकंठ मिश्रा का यह कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से अगले तीन साल के लिए होगा। वह इस शीर्ष वैश्विक पद पर पूर्व आईएएस अधिकारी परमेश्वरन अय्यर की जगह लेंगे।

परमेश्वरन अय्यर की जगह लेंगे मिश्रा
विश्व बैंक के मौजूदा कार्यकारी निदेशक परमेश्वरन अय्यर का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। अय्यर उत्तर प्रदेश कैडर के 1981 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं, जिन्हें फरवरी 2023 में इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सरकार के नए आदेश के मुताबिक, जब तक नीलकंठ मिश्रा वाशिंगटन डीसी स्थित मुख्यालय में अपना कार्यभार नहीं संभाल लेते, तब तक परमेश्वरन अय्यर इस पद पर बने रहेंगे। इसके लिए एसीसी ने अय्यर के सेवा विस्तार को मंजूरी दे दी है, जो 19 जून 2026 के बाद भी प्रभावी रहेगा।
नीति और बाजार का बड़ा अनुभव
नीलकंठ मिश्रा भारत के आर्थिक नीति निर्धारण में एक जाना-माना नाम हैं। वह वर्तमान में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के अंशकालिक सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह परिषद सीधे प्रधानमंत्री को आर्थिक और उससे जुड़े नीतिगत मुद्दों पर स्वतंत्र रूप से सलाह देती है। इसके अलावा, मिश्रा के पास वैश्विक वित्तीय बाजारों का भी लंबा और गहरा अनुभव है। वह वर्तमान में क्रेडिट सुइस में एशिया पैसिफिक के इक्विटी स्ट्रैटेजी के सह-प्रमुख और इंडिया स्ट्रैटेजिस्ट के रूप में कार्यरत हैं।
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आईआईटी कानपुर के गोल्ड मेडलिस्ट
नीलकंठ मिश्रा की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद शानदार रही है। वह देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर के छात्र रहे हैं और वहां उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया था। अपनी तीक्ष्ण आर्थिक समझ के कारण वह कई अन्य महत्वपूर्ण सरकारी और नियामक निकायों से भी जुड़े रहे हैं। मिश्रा भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईएडीआई) के अंशकालिक अध्यक्ष और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के अंशकालिक सदस्य के रूप में भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं।
वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व
विश्व बैंक में कार्यकारी निदेशक का पद बेहद रसूखदार और रणनीतिक माना जाता है। इस भूमिका में नीलकंठ मिश्रा अमेरिका में बैठकर न केवल भारत बल्कि वैश्विक वित्तीय नीतियों को आकार देने में मदद करेंगे। उनके पास निजी क्षेत्र के बाजार की समझ और सरकारी नीतियों के संचालन का जो अनूठा मिश्रण है, वह विश्व बैंक में भारत के पक्ष को और मजबूती से रखने में मददगार साबित होगा।

