Vimal Ad SRK Ajay Devgun FDA Notice: महाराष्ट्र में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी FDA ने बॉलीवुड के बड़े स्टार्स पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. एफडीए ने मान मसाला बनाने वाली विष्णु एंड कंपनी ट्रेडमार्क्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के एड को लेकर सुपरस्टार शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस जारी किया है.
एफडीए का मानना है कि विमल इलायची के विज्ञापन से विमल पान मसाला ब्रांड का दूसरे तरीके से प्रचार हो कहा है. नोटिस में कहा गया कि इससे ग्राहक गुमराह हो सकते हैं. जानिए इस विज्ञापन के लिए SRK, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ ने कितने रुपए फीस चार्ज की थी.
सालों से विमल इलायची के विज्ञापन में नजर आ रहे ये स्टार्स
शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ कई सालों से विमल इलायची के विज्ञापन में नजर आ रहे हैं. ‘बोलो जुबां केसरी’ के नाम से इस विज्ञापन ने खूब सुर्खियां भी बटौरीं. पहले यह विज्ञापन सिर्फ अजय देवगन करते थे, लेकिन बाद में इसमें शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ को भी शामिल किया गया.
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाहरुख खान बड़े ब्रांड्स के विज्ञापन के लिए आमतौर पर करीब 8 से 12 करोड़ रुपए हर दिन या कैंपेन के हिसाब से चार्ज करते हैं. हालांकि पान मसाला या इलायची जैसे बड़े और विवादित ब्रांड कैंपेन में उनकी फीस करीब 20 से 30 करोड़ रुपये तक हो सकती है.
अजय देवगन कितनी फीस लेते हैं?
रिपोर्ट्स के मुताबिक,अजय देवगन विमल ब्रांड के पुराने और मुख्य चेहरों में से एक हैं. अजय देवगन इस ब्रांड के लिए साल का या कैंपेन के आधार पर करीब 10 से 15 करोड़ रुपये चार्ज करते हैं. इस विज्ञापन के लिए उनकी सही फीस कितनी है, इसकी पुख्ता जानकारी नहीं है.
टाइगर श्रॉफ की फीस कितनी?
टाइगर श्रॉफ किसी विज्ञापन के लिए लगभग 3 से 5 करोड़ रुपये लेते हैं. इसी आधार पर इस कैंपेन में भी उनकी फीस करीब 3 से 5 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. स्टार्स की फीस का अंदाजा मीडिया रिपोर्ट्स और इंडस्ट्री के अनुमान के आधार पर लगाया जाता है. एबीपी नेटवर्क सटीकता की पुष्टि नहीं करता है.
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गौरतलब है कि एफडीए ने तीनों बॉलीवुड एक्टर्स को इस प्रोडक्ट से अपना जुड़ाव खत्म करने और सोशल मीडिया अकाउंट से विज्ञापन से जुड़ी प्रचार पोस्ट हटाने को भी कहा है.
महाराष्ट्र में पान मसाला पर रोक
महाराष्ट्र में गुटखा, पान मसाला, फ्लेवर्ड तंबाकू और कुछ दूसरे तंबाकू सामान बनाने, रखने, ले जाने, बांटने और बेचने पर रोक है. जुलाई 2012 में फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड एक्ट, 2006 के अनुसार इस रोक को और सख्त किया गया था. इसके बाद जून 2026 में FDA के ऑफिसरों को कानून के खिलाफ काम करने वाले तंबाकू सप्लायरों के खिलाफ MCOCA के अनुसार कार्रवाई करने की भी इजाजत दी गई.


