हां! आज का ही दिन तो था जब 14 अगस्त 1947 की देर रात हिन्दुस्तान में तिरंगा लहराया और 15 अगस्त की सुबह उदय हुए सूर्य की किरणों से आजाद भारत नहा उठा। हर तरफ हर्षोल्लास और जश्न का माहौल था। ढोल, नगाड़े, ताशे बज रहे थे। जन गण मन…, वंदे मातरम… और मंगलगीत गाते हुए प्रभातफेरी में शामिल युवा एक-दूसरे को मिठाई खिला रहे थे। मानो हर घर में दीपावली मनाई जा रही है।

इसके इतर हम सभी नंगे पांव, बच्चों को गोद में लिए, जानवरों को हांकते हुए जान बचाने को मीरपुर (मौजूदा पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर/पीओके) से जम्मू-कश्मीर में शरण लेने के लिए भागे जा रहे थे। उन हजारों शरणार्थियों में मैं (पुष्पा देवी) भी शामिल थी। उस समय मेरी उम्र करीब 17 साल थी। मीरपुर जिले के पंदी की खुई गांव मेंं मेरा घर था। ससुर सोहन लाल की किराने और पति सीताराम गुप्ता की कपड़े की दुकान थी।

