राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा घटनाक्रम:आरोपी नहीं चंपत राय और अनिल मिश्रा फिर क्यों छोड़ा पद? दिया गया बड़ा संदेश – Ram Mandir Trust Why General Secretary Champat Rai And Trustee Anil Mishra Resign
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में शुक्रवार को बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया। राम मंदिर में मिले दान में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। दोनों नेताओं पर सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन जांच के बीच उनके इस्तीफे को नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है।
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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी।
– फोटो : अमर उजाला।
सात करोड़ का घोटाला
सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर में प्राप्त दान में सात करोड़ रुपये से अधिक की कथित गड़बड़ी की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है। जांच के दौरान दान प्रबंधन में कई स्तरों पर कथित खामियां सामने आने के बाद आठ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। हालांकि जांच एजेंसियों ने अब तक चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी नहीं बनाया है।
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चंपत राय व डॉ. अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा।
– फोटो : amar ujala
यह संदेश देने के लिए छोड़ा पद
बताया जा रहा है कि दोनों ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से अपने पद छोड़ने का फैसला किया है। ट्रस्ट के भीतर इसे प्रशासनिक जवाबदेही के रूप में भी देखा जा रहा है।
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चंपत राय
– फोटो : amar ujala
कौन हैं चंपत राय?
80 वर्षीय चंपत राय उत्तर प्रदेश के बिजनौर के रहने वाले हैं। सार्वजनिक जीवन में आने से पहले वह रसायन विज्ञान के प्राध्यापक रहे। कम उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े और वर्ष 1980 में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) का हिस्सा बने। राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में उनकी गिनती होती रही है। आपातकाल के दौरान वह 18 महीने तक जेल में भी रहे। वर्ष 2020 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद उन्हें महासचिव बनाया गया था। मंदिर निर्माण, प्रशासन और दान प्रबंधन की जिम्मेदारी उनके पास थी।
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अनिल मिश्रा
– फोटो : अमर उजाला
अनिल मिश्रा की क्या थी भूमिका?
अनिल मिश्रा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी थे। वह अयोध्या के सामाजिक और प्रशासनिक कार्यों से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। ट्रस्ट में उनकी भूमिका मंदिर के प्रशासनिक कार्यों, चढ़ावे और दान व्यवस्था की निगरानी से जुड़ी थी। स्थानीय स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ के चलते उन्हें ट्रस्ट में शामिल किया गया था।