राम मंदिर चंदा चोरी:’नौकरी छोड़ संघ से जुड़े, आपातकाल में 18 माह जेल में रहे’; Up के इस जिले के हैं चंपत राय – Ayodhya Ram Mandir Donation Scam Champat Rai Ancestral Home Is In Nagina He Left His Job To Join Rss
अयोध्या के श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में चोरी की बात सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय बंसल बिजनौर जिले के नगीना के रहने वाले हैं। उन्होंने प्रवक्ता पद छोड़ दिया था और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए। वह आपातकाल में जेल भी गए।
18 नवंबर 1946 को जनपद बिजनौर के नगीना में मोहल्ला सरायमीर के रामेश्वर प्रसाद और सावित्री देवी के घर जन्मे चंपत राय करीब साढ़े चार दशक पहले श्रीराम मंदिर आंदोलन में हिस्सा लेने व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हो गए थे और नगीना में परिवार को छोड़ दिया था। वह दस भाई-बहनों में दूसरे नंबर के हैं।
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नगीना के सरायमीर में चंपत राय का पैतृक निवास
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चंपत राय के भाई संजय बंसल बताते हैं कि उनकी प्राथमिक शिक्षा कस्बे के प्राथमिक पाठशाला से हुई। हिंदू इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। वर्ष 1967 में मेरठ कॉलेज, मेरठ से बीएससी और 1969 में एमएससी वर्धमान कॉलेज बिजनौर से करने के बाद 1970-71 में रोहतक के एक डिग्री कॉलेज में पढ़ाया।
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चंपत राय
– फोटो : amar ujala
उसके उपरांत 1972 में आरएसएम कॉलेज धामपुर (बिजनौर) में भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता बन गए। वर्ष 1980-81 में उन्होंने प्रवक्ता पद से इस्तीफा देकर खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ जोड़ लिया।
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चंपत राय।
– फोटो : अमर उजाला
आपातकाल में 18 महीने तक जेल में रहे
25 जून, 1975 को जब देश में आपातकाल लगा तो चंपत राय आरएसएम कॉलेज धामपुर में प्रवक्ता थे। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने कॉलेज पहुंची तो प्राचार्य के कक्ष में उन्हें बुलवाया गया। उस समय वे कक्षा में विद्यार्थियों को पढ़ा रहे थे। प्राचार्य कक्ष में पुलिस से उन्होंने कहा कि घर से वे कपड़े लेकर पुलिस कोतवाली पहुंच रहे हैं। घर आने पर माता-पिता कोतवाली तक साथ गए। करीब 18 महीने तक जेल में रहे।
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सुनील बंसल
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भाई सुनील बंसल ने कहा- मामले की निष्पक्ष जांच की जाए
मोहल्ला सराय मीर में बर्तन की छोटी सी दुकान चलाने वाले चंपत राय के भाई सुनील बंसल चंपत राय पर लगे आरोपों को राजनैतिक दुर्भावना से ग्रसित बताते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने राम मंदिर आंदोलन व देशसेवा के लिए घर, परिवार व नौकरी का त्याग किया। उनका कहना है कि उनके इस्तीफे की खबर से उन्हें बहुत पीड़ा हुई है।