जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में ओवैसी ने कहा कि किसी भी संपत्ति या धार्मिक स्थल के खिलाफ कार्रवाई से पहले संबंधित पक्ष को कानूनी प्रक्रिया और अपील का अधिकार मिलना चाहिए। उनके मुताबिक, सहारनपुर में मस्जिद के मामले में इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
‘कलेक्टर कार्यालय से पहले से मौजूद थी मस्जिद’
ओवैसी ने दावा किया कि जिस मस्जिद को गिराया गया, वह वहां कलेक्टर कार्यालय बनने से पहले से मौजूद थी। उन्होंने कहा कि मस्जिद वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है और उसे कानूनी संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यदि किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होती है तो उसे भी कोर्ट और संवैधानिक संस्थाओं में अपील का अवसर मिलता है। ऐसे में धार्मिक स्थल के मामले में भी कानून की प्रक्रिया का पालन होना चाहिए था। ओवैसी ने आरोप लगाया कि कार्रवाई इतनी जल्दबाजी में की गई कि संबंधित पक्ष को ऊपरी अदालत का रुख करने का अवसर तक नहीं मिला।
‘एक जगह दो धार्मिक स्थल तो कार्रवाई सिर्फ मस्जिद पर क्यों?’
एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि एक ही स्थान पर अगर दो धार्मिक स्थल मौजूद हैं तो कार्रवाई केवल मस्जिद के खिलाफ क्यों की गई। उन्होंने धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में समानता और संवैधानिक व्यवस्था का पालन करने की मांग की।
ओवैसी ने केंद्र के वक्फ संशोधन कानून पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों और वक्फ संपत्तियों से जुड़े मामलों में कानून और संवैधानिक अधिकारों का पालन जरूरी है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि देश के नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार मिला हुआ है। ओवैसी ने भाजपा और आरएसएस पर धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को कमजोर करने का आरोप लगाया।
समान नागरिक संहिता पर भी भाजपा सरकार को घेरा
उत्तराखंड की समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी पर भी ओवैसी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि यूसीसी में हिंदू मैरिज एक्ट के कई प्रावधानों को शामिल किया गया है और अलग-अलग समुदायों की वैवाहिक एवं पारिवारिक व्यवस्थाओं को एक कानून के तहत लाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग समुदाय रहते हैं और किसी एक समुदाय के कानून को दूसरे समुदाय पर लागू करना संविधान की भावना के खिलाफ है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि यूसीसी के जरिए मुस्लिम समुदाय के विवाह, तलाक और संपत्ति से जुड़े अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
असीम वकार के आरोपों पर ओवैसी का पलटवार
हाल ही में एआईएमआईएम छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए असीम वकार के आरोपों पर ओवैसी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वकार को करीब 10 साल बाद याद आया कि एआईएमआईएम भाजपा की ‘बी टीम’ है। ओवैसी ने कहा कि राजनीतिक दलों में लोग आते-जाते रहते हैं, लेकिन पार्टी बनी रहती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस में शामिल होने के बाद पार्टी के नेता वकार का ख्याल रखेंगे।
राजस्थान में संगठन विस्तार पर ओवैसी का फोकस
ओवैसी ने राजस्थान निकाय चुनाव को लेकर कहा कि वह अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार करने जयपुर आए हैं। उन्होंने लोगों से एआईएमआईएम प्रत्याशियों को जिताने की अपील की, ताकि वार्ड स्तर पर विकास के काम हो सकें और राजस्थान में पार्टी का संगठन मजबूत हो।
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उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम राजस्थान में अपनी स्थानीय नेतृत्व क्षमता विकसित करना चाहती है। ओवैसी के मुताबिक, पार्टी के प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह नहीं मिल पाने के मामले में एआईएमआईएम ने हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। इसके बावजूद पार्टी के प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं और कार्यकर्ता मजबूती से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में एआईएमआईएम के लिए राजस्थान के निकाय चुनाव स्थानीय स्तर पर अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने की कोशिश के तौर पर भी देखे जा रहे हैं।


