बिजली चले जाने से आंगन में सो रहे दो मासूम भाई-बहन के लिए जहरीले सांप का डंक मौत का पैगाम बन गया। गांव बस्सियां की उप्पल पत्ती में मंगलवार रात सांप के डसने से गंभीर रूप से घायल सात वर्षीय जसप्रीत कौर की मौत के करीब 18 घंटे बाद उसके आठ वर्षीय भाई जोबनप्रीत सिंह ने भी बुधवार रात लुधियाना के सीएमसी अस्पताल में दम तोड़ दिया।

गुरुवार बाद दोपहर बस्सियां के श्मशानघाट में दोनों भाई-बहन का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। रक्षाबंधन से ठीक एक दिन पहले दो मासूमों की एक साथ जलती चिताओं का दृश्य देखकर श्मशानघाट में मौजूद हर आंख नम हो गई।
आधी रात बिस्तर के नीचे बैठा था सांप, भाई ने दादी को जगाया
परिजनों के मुताबिक, रात करीब तीन बजे जोबनप्रीत की नींद खुली। उसने पास सो रही दादी को जगाकर बताया कि उसके हाथ में कुछ हुआ है। परिवार के लोगों ने उठकर देखा तो बिस्तर के नीचे सांप बैठा था। पड़ोसियों की मदद से जोबनप्रीत को तत्काल रायकोट के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे लुधियाना के सीएमसी अस्पताल रेफर कर दिया गया। इसी दौरान पास ही सो रही सात वर्षीय जसप्रीत कौर को सांप के डसने का पता परिवार को रात में नहीं चल सका। सुबह करीब पांच बजे उसने सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। कुछ ही देर में उसके मुंह से झाग निकलने लगा। परिजन उसे रायकोट सिविल अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
18 घंटे बाद भाई ने भी तोड़ा दम
बेटी की मौत के सदमे से परिवार उबर भी नहीं पाया था कि करीब 18 घंटे बाद जोबनप्रीत की हालत भी बिगड़ गई। लुधियाना के सीएमसी अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके साथ ही परिवार की दोनों उम्मीदें एक ही दिन में खत्म हो गईं। बुधवार रात बच्चे की मौत की खबर गांव पहुंचते ही बस्सियां में मातम पसर गया।
ओमान में थी मां, बर्तन मांजते हुए देखा अंतिम संस्कार
इस दर्दनाक हादसे का सबसे कलेजा चीर देने वाला पहलू बच्चों की मां सरबजीत कौर से जुड़ा है। परिजनों के अनुसार, वह पिछले करीब डेढ़ साल से ओमान में एक शेख परिवार के घर नौकरानी के तौर पर काम कर रही है। बच्चों की मौत की खबर मिलने के बाद सरबजीत कौर ने शेख परिवार से बार-बार गुहार लगाई कि उसे अपने बच्चों के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत जाने दिया जाए, लेकिन आरोप है कि उसे छुट्टी नहीं दी गई और उसका पासपोर्ट देने से साफ इंकार कर दिया गया।
