समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आठ अक्तूबर को अयोध्या जाएंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, वह पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होंगे। जारी कार्यक्रम में राममंदिर दर्शन का उल्लेख नहीं है, इसको लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

अखिलेश यादव का अयोध्या दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हो रही हैं। सपा ने अयोध्या विधानसभा सीट से पवन पांडेय को प्रत्याशी घोषित किया है। ऐसे में सपा प्रमुख का उनके आवास पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होना स्थानीय संगठन और चुनावी तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अयोध्या लंबे समय से भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक विमर्श का प्रमुख केंद्र रही है।
अयोध्या में राममंदिर निर्माण के बाद यहां होने वाले नेताओं के दौरे राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा में रहते हैं। ऐसे में अखिलेश यादव का अयोध्या आना और प्रस्तावित कार्यक्रम में राममंदिर दर्शन शामिल नहीं होना राजनीतिक बहस का विषय बना है। भाजपा इसे अपने राजनीतिक विमर्श में उठा सकती है, जबकि सपा इसे धार्मिक आयोजन में भागीदारी और स्थानीय कार्यकर्ताओं से संपर्क के रूप में देख रही है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या में सपा की सक्रियता बढ़ना भी ध्यान देने योग्य है। लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट पर सपा की जीत के बाद अयोध्या की राजनीतिक अहमियत और बढ़ी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि ऐसे में अखिलेश का अयोध्या दौरा पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच राजनीतिक संदेश देने के साथ-साथ क्षेत्र में संगठन को सक्रिय करने का एक अवसर है।
दूसरी ओर, भाजपा के लिए अयोध्या और राममंदिर उसकी राजनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा रहे हैं। ऐसे में अखिलेश के कार्यक्रम को लेकर भाजपा की प्रतिक्रिया भी इस दौरे को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाएगी। वहीं, पूर्व मंत्री पवन पांडे का कहना है कि उनका गांव राममंदिर स्थल से काफी दूर है, इसलिए अखिलेश यादव उनके गांव में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेकर वापस लौट जाएंगे। नवंबर में राममंदिर और हनुमानगढ़ी के दर्शन करेंगे।

