- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने तुर्किए को F-35 बेचने का बचाव किया।
- ट्रम्प ने तुर्किए को अमेरिका का एक बेहतरीन सहयोगी बताया।
- नेतन्याहू ने इस बिक्री पर अमेरिका से आपत्ति जताई थी।
- नेतन्याहू ने कहा F-35 बिक्री मध्य पूर्व संतुलन बिगाड़ देगी।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (27 जुलाई, 2026) को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तरफ से तुर्किए को अमेरिकी एफ-35 फाइटर जेट बेचने को लेकर किए गए विरोध को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि अमेरिका को क्या बेचना चाहिए, यह उन्हें कोई नहीं बताएगा. इसके साथ ही, ट्रंप ने तुर्किए की तारीफ करते हुए कहा कि वह अमेरिका का बेहतरीन सहयोगी रहा है.
नेतन्याहू के विरोध पर बोले अमेरिकी राष्ट्रपति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, ‘मुझे कोई यह नहीं बताएगा कि हमें क्या बेचना चाहिए. तुर्किए मेरे लिए एक बेहतरीन सहयोगी रहा है.’ उन्होंने कहा, ‘तुर्किए एक बहुत ताकतवर देश है, जिसके पास एक बहुत बड़ी और मजबूत सेना है और उसके पास कई बेहतरीन सैन्य उपकरण भी हैं.’
उन्होंने आगे कहा, ‘तुर्किए न तो इजरायल का बहुत बड़ा समर्थक है और न ही वहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का, लेकिन वह मेरे लिए बहुत अच्छा सहयोगी रहा है.’
US-तुर्किए के एफ-35 जेट डील पर नेतन्याहू का विरोध
डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान ऐसे समय पर आया, जब इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू सोमवार (27 जुलाई, 2026) को अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ उच्च स्तरीय बातचीत के लिए वाशिंगटन पहुंचे. दोनों नेताओं की द्विपक्षीय बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ ईरान के साथ संघर्ष से जुड़े मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल थे.
US-तुर्किए डील से मिडिल ईस्ट में ताकत का संतुलन बिगड़ेगा- नेतन्याहू
वहीं, सीएनएन को दिए गए एक इंटरव्यू में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से तुर्किए को F-35 फाइटर जेट बेचने की मंजूरी नहीं देने का अनुरोध किया है. उन्होंने संकेत दिया था कि वह अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने के बारे में सोच रहे हैं.
नेतन्याहू ने कहा, ‘अमेरिका के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान एफ-35 को बेचने से तुर्किए अमेरिका का दोस्त नहीं बन जाएगा. अगर वाशिंगटन तुर्किए को एफ-35 लड़ाकू विमान बेचता है, तो इससे पूरे इलाके पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा और मिडिल ईस्ट में ताकत का संतुलन बिगड़ जाएगा.’
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