महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिव सेना (यूबीटी) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने रविवार को मुंबई स्थित अपने आवास ‘मातोश्री’ में पार्टी सांसदों के साथ एक बेहद अहम बैठक की। इस बैठक में कुछ सांसद सीधे तौर पर मातोश्री पहुंचे, जबकि कुछ अन्य सांसदों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

बैठक में मुख्य रूप से सांसद अनिल देसाई, संजय राउत और राजाभाऊ पराग प्रकाश वाजे व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे। वहीं, यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय देशमुख और हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल आष्टेकर ऑनलाइन माध्यम से इस चर्चा में शामिल हुए।
राजनीतिक उथल-पुथल के बीच रणनीति
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब देश और राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हाल ही में विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस वक्त आंतरिक कलह और बिखराव से जूझ रही है। टीएमसी के विधायकों का एक बड़ा धड़ा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के फैसले से असहमत है। इन्हें विधानसभा में अलग ‘विपक्ष’ के रूप में मान्यता भी मिल चुकी है। इतना ही नहीं, लोकसभा में भी टीएमसी के संसदीय दल में फूट के आसार हैं, जहां सांसद अलग बैठने की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। इस बदलते राष्ट्रीय परिदृश्य और महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक कयासों को देखते हुए उद्धव ठाकरे का अपने सांसदों को एकजुट करना बेहद रणनीतिक माना जा रहा है।
मीडिया की अटकलों पर तीखा पलटवार
मातोश्री की बैठक खत्म होने के बाद शिव सेना-यूबीटी के नेताओं ने मीडिया में चल रही दलबदल की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया। पार्टी के फायरब्रांड नेता और सांसद संजय राउत ने कहा कि हमें डराने की कोशिशें नाकाम रहेंगी। उन्होंने कहा कि आप किस ऑपरेशन टाइगर की बात कर रहे हैं? हम सब शेर हैं। अब हम ‘ऑपरेशन वोल्फ’ शुरू करने जा रहे हैं। हम डरने वाले नहीं हैं। हमारे सभी सांसद और हमारा संसदीय दल पूरी तरह एकजुट, मजबूत और साथ है। यह आगे भी इसी तरह रहेगा।
दूसरी ओर, वरिष्ठ नेता और सांसद अनिल देसाई ने भी इन खबरों को अफवाह बताया। देसाई ने कहा, ‘हमारे सांसदों और विधायकों की यह एक नियमित बैठक थी। ऐसी बैठक बुलाने के लिए किसी विशेष कारण या मजबूरी की जरूरत नहीं होती है। हममें से चार लोग यहां मौजूद थे और पांच अन्य साथी अपने व्यक्तिगत कार्यों के चलते बाहर से ऑनलाइन जुड़े। हमारे सभी नौ सांसद पूरी तरह एक साथ हैं। पार्टी में कोई समस्या नहीं है और मीडिया में चल रही सभी अटकलें बेबुनियाद हैं।’
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अतीत का साया और कानूनी पेच
शिव सेना यूबीटी के भीतर यह सतर्कता साल 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम को देखकर भी समझी जा सकती है। तब एक बड़े धड़े ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बगावत कर दी थी और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए से हाथ मिला लिया था। इसके बाद साल 2024 के महाराष्ट्र चुनाव में भी एनडीए ने सत्ता में वापसी की।
इसी बीच, कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने भी विधायकों और सांसदों के इस बिखराव पर चिंता जताई है। सिंघवी ने कहा, ‘साल 2022 के शिव सेना के फैसले को ध्यान से पढ़ना चाहिए। विधायक दल में केवल दो-तिहाई के बहुमत का कोई ऐसा नियम नहीं है जो ‘दल-बदल विरोधी कानून’ को लागू होने से रोक सके। ऐसे लोग अयोग्य ठहराए जाने के दायरे में आएंगे। हालांकि, इस देश में कानूनी प्रक्रिया ही अपने आप में एक सजा बन जाती है।’
दरअसल, साल 2022 का यह फैसला एकनाथ शिंदे की उसी बगावत से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बहुमत खोने का दावा किया था। इसके बाद देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल को पत्र सौंपकर ठाकरे सरकार के पास बहुमत न होने की बात कही थी, जिसके बाद उद्धव ठाकरे को सदन में शक्ति परीक्षण का सामना करने का निर्देश दिया गया था।

