प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’में नंदग्राम की बबीता के संघर्ष को साझा किया। उन्होंने बबीता को महिला सशक्तिकरण और सरकारी योजनाओं के माध्यम से मिली सफलता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। बबीता की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को साकार करने का हौसला रखती हैं।

आर्थिक तंगी से लड़कर हासिल की सफलता
कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन ने कई व्यवसायों को प्रभावित किया, और बबीता का व्यवसाय भी इससे अछूता नहीं रहा। काम बंद होने के कारण उनके परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया था। ऐसे मुश्किल समय में, जब कहीं से मदद नहीं मिली, बबीता ने वर्ष 2022 में 10 हजार रुपये का लोन लेकर नंदग्राम टैंपो स्टैंड के पास पूजा सामग्री की दुकान फिर से शुरू की। इससे पहले भी वह इसी व्यवसाय में थीं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उन्हें इसे बंद करना पड़ा था। हार न मानते हुए, उन्होंने धीरे-धीरे अपने कारोबार को आगे बढ़ाया और जरूरत के अनुसार आगे भी लोन लेकर उसे विस्तारित किया।
आत्मनिर्भरता और दूसरों को प्रेरित करना
बबीता तीन बेटों की मां हैं। उनके बड़े बेटे विनय शर्मा 26 वर्ष के हैं और दूसरे बेटे राहुल 25 वर्ष के हैं। सबसे छोटे बेटे ने हाल ही में दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है। उनके पति उनसे अलग रहते हैं। इन व्यक्तिगत चुनौतियों के बावजूद, बबीता ने न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण किया, बल्कि अब वह अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने बताया है कि उन्होंने लगभग 100 अन्य लोगों को भी छोटे स्तर पर अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद की है।
बबीता की कहानी दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करके किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में उनका उल्लेख, महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और यह उन अनगिनत महिलाओं को प्रोत्साहित करेगा जो अपनी परिस्थितियों से जूझ रही हैं।
