नानी के करियर की सबसे बड़ी ओपनिंग का रिकॉर्ड बनाने के बाद से ‘द पैराडाइज’ की कमाई में भारी गिरावट देखी जा रही है. इस फिल्म को क्रिटिक्स और दर्शकों से मिले-जुले रिव्यू मिले, और कई लोगों ने फिल्म की कहानी की आलोचना की जिसके चलते इसकी कमाई पर असर पड़ा. वीकडेज में आने के बाद तो इसकी रफ्तार पूरी तरह पटरी से उतर गई है. मंडे के बाद मंगलवार को भी इसकी कमाई में मंदी देखी गई इसके बावजूद 6ठे दिन ये फिल्म भारत में 100 करोड़ का आंकड़ा पार करने में सफल रही. चलिए यहां फिल्म के छठे दिन यानी मंगलवार के कलेक्शन को जानते हैं.
‘द पैराडाइज’ ने छठे दिन कितनी की कमाई?
नानी और श्रीकांत ओडेला की ‘द पैराडाइज’ से काफी उम्मीदें थीं हालांकि सिनेमाघरों में दस्तक देने के बाद ये दर्शकों की कसौटी पर खरी नहीं उतर पाई और ओपनिंग के बाद ही इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई.
- बता दें कि ‘द पैराडाइज़’ ने अपने प्रीमियर शो से 11.60 करोड़ और शुक्रवार को, यानी अपनी ओपनिंग वाले दिन 34.65 करोड़ कमाए थे.
- इसी के साथ इस फ़िल्म ने 46.25 करोड़ की ओपनिंग की थी नानी के करियर की सबसे बड़ी ओपनिंग थी.
- फिर दूसरे दिन फ़िल्म की कमाई में जबरदस्त गिरावट आई और इसने 14.90 करोड़ कमाए.
- तीसरे दिन शनिवार को फ़िल्म ने रफ्तार पकड़ी और 15.25 करोड़ कमाए. रविवार को कमाई स्थिर रही और इसने 15.70 करोड़ का कलेक्शन किया.
- सबसे बड़ी गिरावट सोमवार को आई, जब फ़िल्म ने 5 करोड़ कमाए.
- अब सैकनिल्क की अर्ली ट्रेंड रिपोर्ट के मुताबिक ‘द पैराडाइज’ ने मंगलवार को 4.40 करोड़ कमाए, जो इसका अब तक का सिंगल डे का सबसे कम कलेक्शन है.
- इसके साथ ही इस फिल्म की भारत में 6 दिनों की कुल नेट कमाई अब 101.50 करोड़ रुपये हो गई है.
‘द पैराडाइज’ बनी नानी की पहली 100 करोड़ी फिल्म
‘द पैराडाइज’ की कमाई में मंगलवार यानी छठे दिन काफी गिरावट तो दर्ज की गई लेकिन यह नानी की पहली फ़िल्म है जिसने भारत में 100 करोड़ का आंकड़ा पार किया है. इससे पहले, ‘हिट द थर्ड केस’ और ‘सरिपोधा शनिवारम’ 100 करोड़ के आंकड़े के करीब तो पहुंचीं, लेकिन उसे पार नहीं कर पाईं. बता दें कि ‘द पैराडाइज़’ को हिंदी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में रिलीज किया गया है और उम्मीद के मुताबिक इसकी ज्यादातर कमाई तेलुगु वर्जन से ही हुई है.
‘द पैराडाइज’ के बारे में
‘द पैराडाइज’ को श्रीकांत ओडेला ने डायरेक्ट किया है और इसे सुधाकर चेरुकुरी और ईशान सक्सेना ने श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वर सिनेमाज और IVY एंटरटेनमेंट के बैनर तले प्रोड्यूस किया है. इसमें नानी, मोहन बाबू, कायदू लोहार, सोनाली कुलकर्णी और राघव जुयाल मुख्य भूमिकाओं में हैंय यह फ़िल्म 1980 के दशक में नागरिकता के लिए संघर्ष करने वाले ‘सवारी’ नाम के एक कबीले की कहानी पर बेस्ड है.
सोनाली कबीले की नेता सम्मक्का का किरदार निभा रही हैं और नानी उनके बेटे जदल की भूमिका हैं. मोहन बाबू शिकंजा मलिक नाम के एक सामंती शासक की भूमिका में हैं और राघव उनके बेटे विक्रम मलिक का किरदार निभा रहे हैं. फ़िल्म में सम्मक्का और जदल का टकराव न सिर्फ़ शिकंजा और विक्रम से होता है, बल्कि उस सिस्टम से भी होता है जो उनके योगदान के बावजूद उन्हें कानूनी तौर पर मान्यता देने से इनकार करता है.


