लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

भारत संग बॉर्डर विवाद पर बालेन शाह मान ही नहीं रहे, यूके के मीडिएशन पर सफाई भी दी और अड़े भी, ‘जरूरत पड़ी तो…’

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने रविवार (21 जून 2026) को भारत-नेपाल सीमा विवाद को सुलझाने में यूनाइटेड किंगडम (UK) की संभावित भूमिका को लेकर दिए गए अपने पहले बयान पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि नेपाल ब्रिटिश मध्यस्थता नहीं चाहता है. 31 मई को संसद के निचले सदन में सांसदों के सवालों का पहली बार जवाब देते हुए प्रधानमंत्री शाह ने कहा था कि नेपाल ने सिर्फ भारत और चीन से ही नहीं, बल्कि ब्रिटिश सरकार से भी बातचीत की है, क्योंकि ब्रिटिश शासन के समय के कुछ ऐतिहासिक रिकॉर्ड उनके पास मौजूद हैं.

बालेन शाह ने तब कहा था, “हमारा मानना है कि इंग्लैंड (यूके) को भी इस मामले में रुचि लेनी चाहिए, क्योंकि यह मुद्दा उस समय से जुड़ा है जब ब्रिटिश भारत पर शासन करते थे. इसलिए इन सभी मामलों का समाधान बातचीत और कूटनीतिक वार्ताओं के जरिए होना चाहिए.” इसके अलावा, शाह ने यह भी कहा था कि जिस तरह नेपाल लंबे समय से भारत पर अतिक्रमण के आरोप लगाता रहा है, उसी तरह नेपाल ने भी भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किया है. उनके इस बयान की विपक्षी दलों, विदेश नीति विशेषज्ञों और सीमा मामलों के जानकारों ने आलोचना की थी.

नेपाल पीएम ने सफाई में आखिर क्या कहा?

रविवार को दक्षिणी चितवन जिले में शुरू हुए राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के महाधिवेशन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए शाह ने अपने पुराने बयान पर सफाई दी. उन्होंने कहा, “कालापानी और लिपुलेख के संबंध में हमारे पास सबूत हैं. मेरा मतलब सिर्फ इतना था कि अगर ब्रिटिश शासनकाल के रिकॉर्ड पेश करने की जरूरत पड़ी, तो हम उन्हें प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं. हम ब्रिटेन की मध्यस्थता नहीं चाहते.”

हमारे पास सबूत, हम खुद करेंगे समाधान- बालेन शाह

उन्होंने कहा कि नेपाल अपने पड़ोसी देशों के साथ सीमा संबंधी मुद्दों को सीधे बातचीत और तथ्यों के आधार पर सुलझाना चाहता है. शाह ने कहा, “हम अपने पड़ोसियों के साथ चर्चा करके इन मामलों का समाधान खुद करेंगे. हमारे पास सबूत हैं. मेरे राष्ट्रवाद को लेकर किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए.” सीमा विवाद कई दशकों से भारत-नेपाल संबंधों में एक प्रमुख विवादित मुद्दा बना हुआ है.

लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी में भारत का नियंत्रण

दोनों देश लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्रों पर अपना-अपना दावा करते हैं. फिलहाल यह इलाका भारत के प्रशासनिक नियंत्रण में है, लेकिन नेपाल लंबे समय से इन क्षेत्रों को अपनी संप्रभु भूमि बताता रहा है. दोनों देशों का कहना है कि लंबित सीमा विवादों का समाधान कूटनीतिक बातचीत और आपसी समझ के जरिए किया जाना चाहिए. शाह के पहले दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा था कि भारत और नेपाल के बीच सीमा विवादों के समाधान में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है. मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद द्विपक्षीय तंत्र ही ऐसे मुद्दों को सुलझाने का सही माध्यम हैं.

ये भी पढ़ें- पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद पर किया कमेंट, भारत की दो टूक- ‘आसिफ अली जरदारी पहले अपने…’

भारत ने मामले पर क्या कहा था?

जून की शुरुआत में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि दोनों देश सीमा संबंधी मामलों को तय ढांचे के तहत सुलझाने की दिशा में काम कर रहे हैं. जायसवाल ने कहा, “सीमा संबंधी मुद्दों के समाधान के लिए हमारे पास स्थापित द्विपक्षीय तंत्र मौजूद हैं. भारत और नेपाल के बीच जो भी द्विपक्षीय मामले हैं, उनमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है.” शाह की इन टिप्पणियों के कारण जून की शुरुआत में आरएसपी अध्यक्ष रबी लामिछाने की भारत यात्रा भी चर्चा से कुछ हद तक पीछे छूट गई. लामिछाने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के निमंत्रण पर भारत आए थे.

ये भी पढ़ें- ईरान-अमेरिका डील के बाद पाकिस्तान से आई धमकी, बिलावल भुट्टो बोले- ‘हम भारत को….’

आईएनएस के इनपुट के साथ

]
Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

‘भारत के खिलाफ जंग छेड़ देंगे’, बिलावल भुट्टो के बाद पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने दी इंडिया को धमकी

स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की बातचीत खत्म, हाई लेवल कमेटी पर बनी सहमति, अराघची का आया पहला रिएक्शन

स्विट्जरलैंड में हाई-वोल्टेज ड्रामा! ईरान-अमेरिका बातचीत पर गहराया संकट, जानें ऐसा क्या हुआ कि 80 मिनट ही हो पाई बात

US-Iran Switzerland Talks: अपनों के बीच ही फंसे डोनाल्ड ट्रंप! ‘ईरान को अरबों-खरबों डॉलर, अमेरिकियों की होगी हत्या’, किसने डराया?

Iran US Talk in Switzerland: अमेरिकियों से न हाथ मिलाया, न फोटो खिंचाई, बातचीत की टेबल पर ईरान ने नहीं बदले तेवर

US-ईरान पीस टॉक के बीच कतर के गैस टर्मिनल में बड़ा धमाका, 54 घायल, 18 लापता

Leave a Comment