India Vape Ban Rules: भारत में ई-सिगरेट और Vape पर कानूनी रोक के बावजूद बच्चों और किशोरों तक इनकी पहुंच को लेकर चिंता जताई जा रही है. Prohibition of Electronic Cigarettes Act, 2019 के तहत ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री, वितरण, स्टोरेज और विज्ञापन पर रोक है. कानून में इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए ई-सिगरेट के प्रचार को भी विज्ञापन के दायरे में रखा गया है. इसके बावजूद बच्चों और युवाओं में नए तरह के निकोटीन प्रोडक्ट्स की बढ़ती पहुंच का मुद्दा सामने आ रहा है.
इसी मुद्दे पर Mothers Against Vaping (MAV) ने संसद में आवाज उठाए जाने का स्वागत किया है. संगठन का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों के बीच Vape को ‘सेफ’, ‘कूल’ और नुकसानरहित बताकर पेश किया जा रहा है. MAV के मुताबिक सोशल मीडिया, इन्फ्लुएंसर्स और अवैध विक्रेताओं के जरिए इन उत्पादों की पहुंच कम उम्र के बच्चों और युवाओं तक बढ़ रही है.
बच्चों को ‘कूल’ और ‘सेफ’ बताकर Vape की ओर खींचने का आरोप
MAV ने कहा कि बच्चों और युवाओं को नए तरह के निकोटीन प्रोडक्ट्स से बचाना किसी राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है. यह बच्चों की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और देश के भविष्य से जुड़ा मामला है. संगठन ने ज्यादा से ज्यादा सांसदों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर सख्त कार्रवाई का समर्थन करने की अपील की है.
संगठन ने खास तौर पर इस बात पर चिंता जताई है कि देश में युवाओं की बड़ी आबादी को इन नए निकोटीन उत्पादों के लिए संभावित बाजार के तौर पर देखा जा सकता है. MAV ने विदेशी हितों को लेकर सतर्क रहने और यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि भारत के बच्चे और युवा इन उत्पादों के निशाने पर न आएं.
Vape समेत कई नए निकोटीन प्रोडक्ट्स पर सख्ती की मांग
MAV ने ई-सिगरेट, ENDS, Vape, Heated Tobacco Products (HTPs), Heat-not-Burn और दूसरे नए निकोटीन डिवाइस पर लागू प्रतिबंध को पूरी तरह सख्ती से लागू करने की मांग की है. 2019 के कानून में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट की परिभाषा में ENDS और Heat Not Burn Products जैसे डिवाइस भी शामिल हैं.
संगठन का कहना है कि सिर्फ प्रतिबंध लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि प्रतिबंध के उल्लंघन पर भी प्रभावी कार्रवाई जरूरी है. MAV के मुताबिक सरकार को उन मामलों पर भी नजर रखनी चाहिए जहां प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री या प्रचार अलग-अलग माध्यमों से बच्चों और युवाओं तक पहुंच रहा है.
सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी जवाबदेही
MAV ने सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को भी जवाबदेह बनाने की मांग की है. संगठन का कहना है कि अगर कोई प्लेटफॉर्म प्रतिबंधित नए निकोटीन प्रोडक्ट्स के प्रचार, बिक्री या वितरण को बढ़ावा देता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए. जहां मौजूदा कानून लागू होते हैं, वहां उनका सख्ती से इस्तेमाल करने और जहां कानूनी खामियां हैं, वहां कड़े प्रावधान लाने की मांग की गई है.
यह मांग ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब 2019 के कानून में ‘विज्ञापन’ के दायरे में इंटरनेट और सोशल मीडिया को भी शामिल किया गया है. कानून ई-सिगरेट की ऑनलाइन बिक्री को भी ‘sale’ की परिभाषा में शामिल करता है.
‘अगली पीढ़ी को निकोटीन की लत से बचाना होगा’
MAV की समर्थक और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. भावना बरमी ने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है. उन्होंने सभी सांसदों से वेप और हीट-नॉट-बर्न डिवाइस पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने की मांग की. साथ ही उन्होंने निकोटीन पाउच, पैच और गम जैसे दूसरे नए निकोटीन उत्पादों पर भी प्रतिबंध लगाने की बात कही.
MAV का कहना है कि बच्चों को निकोटीन की लत से बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं है. इसके लिए संसद और सरकार के साथ स्कूलों, माता-पिता, कानून लागू करने वाली एजेंसियों, हेल्थ एक्सपर्ट्स और समाज को मिलकर काम करना होगा. संगठन का कहना है कि सामूहिक प्रयास से ही बच्चों और युवाओं को नए तरह के निकोटीन उत्पादों से दूर रखा जा सकता है.
Mothers Against Vaping क्या है?
Mothers Against Vaping (MAV) खुद को बच्चों और युवाओं को नए तरह के निकोटीन उत्पादों से बचाने के लिए काम करने वाली माताओं का समूह बताता है. संगठन Vape, ई-सिगरेट, Heated Tobacco Products, Heat-not-Burn डिवाइस, निकोटीन पाउच और इसी तरह के दूसरे उत्पादों को बच्चों और युवाओं से दूर रखने की मांग करता है. MAV का कहना है कि ये उत्पाद बच्चों और युवाओं को निकोटीन की लत और आगे चलकर नुकसानदायक निर्भरता की ओर ले जा सकते हैं.


