
Parenting Tips: माता-पिता बनना किसी भी इंसान के लिए दुनिया का सबसे खूबसूरत अहसास होता है, लेकिन इस खूबसूरत अहसास के साथ ढेर सारी जिम्मेदारियां भी आती हैं. अक्सर ऐसा होता है कि जब बच्चा छोटा होता है, तो मम्मी-पापा प्यार और दुलार के चक्कर में बच्चे के सारे काम खुद ही करने लग जाते हैं. छोटी से छोटी चीज जैसे कि पानी का ग्लास उठाना, उसके खिलौनों को उठाकर सही जगह पर रखना या फिर उसके जूतों के खुले हुए लेस बांधना, हर छोटी से छोटी चीज के लिए भी बच्चा तुरंत 'मम्मी या पापा' कहकर आवाज लगाने लग जाता है. शुरुआती दिनों में तो बच्चे की यह आदत हर पैरेंट को बहुत प्यारी लगती है, लेकिन धीरे-धीरे यही बच्चे की पक्की आदत बन जाती है. इसका नतीजा यह होता है कि बच्चा अपने खुद के कामों को भी करना सीख नहीं पाता है, जिस वजह से उसके अंदर कॉन्फिडेंस की कमी भी होने लग जाती है.
अगर आपका बच्चा भी बिल्कुल ऐसा ही है और अपने छोटे से छोटे कामों के लिए भी आप पर ही निर्भर रहता है, तो अब समय आ गया है उसकी इस आदत को बदलने का. आज हम आपको कुछ बहुत ही आसान और सिंपल तरीके बताने जा रहे हैं, जिन्हें अपने और अपने बच्चे के डेली रूटीन में शामिल करके आप उसे अपने खुद के सारे काम खुद करना सिखा सकते हैं. तो चलिए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं.
छोटे-छोटे कामों से शुरुआत करें
आपको यह बात बहुत ही अच्छे से समझनी होगी कि आपका बच्चा अपने सारे कामों को कभी भी एक ही दिन में खुद से करने नहीं लग जाएगा. इसके लिए आपको शुरुआत हमेशा छोटे-छोटे और आसान कामों से करानी होगी. कभी भी अपने बच्चे पर एक साथ बहुत सारे कामों का बोझ डालने की गलती न करें, बल्कि शुरुआत में उसे ऐसे काम करने के लिए कहें जिन्हें वह बिना किसी परेशानी के हंसते-हंसते कर सके. जैसे खाना खाने के बाद अपनी प्लेट उठाकर उसे किचन में सही जगह पर रखना, खेलने के बाद अपने खिलौनों को समेटकर डिब्बे में रखना या फिर स्कूल से आकर अपने जूतों को उतारकर उनकी सही जगह पर रखना. जब आपका बच्चा हर दिन इन छोटे-छोटे कामों को करने लगेगा, तो उसका झिझकना बंद हो जाएगा और उसे ऐसा लगने लगेगा कि वह भी अपने काम खुद कर सकता है.
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जब भी वो सही काम करे, तारीफ जरूर करें
जिस तरह आपको तारीफ सुनना अच्छा लगता है, ठीक उसी तरह आपके बच्चे को भी अपनी तारीफ सुनना अच्छा लगता है. जब भी आपका बच्चा अपना कोई भी काम खुद कर ले, तो दिल खोलकर उसकी तारीफ करें. आप उसे 'वाह! बहुत बढ़िया!', 'तुम तो बहुत समझदार हो गए हो!' या 'मुझे तुम पर बहुत प्राउड महसूस हो रहा है!' जैसे प्यारे शब्दों से शाबाशी दे सकते हैं. आपकी यह छोटी सी तारीफ उसके अंदर एक नया जोश भरने का काम करती है. आपके ऐसा करने से बच्चे को लगने लगता है कि खुद अपने कामों को अगर वह करेगा, तो मम्मी और पापा बहुत खुश होंगे. आपको सिर्फ इस बात का ख्याल रखना है कि आपको उसकी तारीफ सिर्फ उसी समय नहीं करनी है जब वह अपने काम को खत्म कर ले, बल्कि अगर उसने कोशिश की है, तो भी आपको उसकी तारीफ करनी है.
गलती हो जाए तो गुस्सा न करें, थोड़ा सब्र रखें
जब भी आपका बच्चा पहली बार अपना कोई भी काम खुद करने की कोशिश करे, तो उससे गलती होना एक बहुत ही नॉर्मल सी बात है. हो सकता है कि जब वह किचन से पानी का ग्लास उठाकर ला रहा हो, तो उससे पानी जमीन पर गिर जाए या फिर कपड़े फोल्ड करते समय सब कुछ बिखर जाए. अगर ऐसा हो भी जाए, तो आपको उस पर गुस्सा नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे वह डर जाएगा और अगली बार से अपना कोई भी काम खुद करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा. इसलिए जब आपका बच्चा अपने कामों को खुद करना शुरू करे, तो आपको थोड़ा पेशेंस रखना होगा. अगर उससे कोई गलती हो भी जाए, तो मुस्कुराकर कहें, 'कोई बात नहीं बेटा, अगली बार ध्यान रखना.' इसके बाद उसे सफाई करने के काम में भी अपने साथ शामिल करें. जब आप ऐसा करते हैं, तो आपका बच्चा जिम्मेदारियां सीखने और समझने लगता है.
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बच्चे को खुद अपने फैसले लेने दें
अक्सर पेरेंट्स में यह आदत देखने को मिलती है कि वे अपने बच्चों की हर छोटी से छोटी पसंद का फैसला भी खुद ही कर लेते हैं. अगर आप अपने बच्चे को इंडिपेंडेंट बनाना चाहते हैं, तो उसे उसकी उम्र के हिसाब से छोटे-छोटे फैसले खुद लेने का मौका दें. जैसे आज उसे कौन से कलर के कपड़े पहनने हैं या फिर पार्क जाते समय उसे कौन सा खिलौना अपने साथ लेकर जाना है. इसके लिए आप उसे कुछ ऑप्शंस भी दे सकते हैं, जैसे, 'आज तुम रेड टी-शर्ट पहनोगे या फिर ब्लू वाली?' जब आपका बच्चा खुद अपनी पसंद चुनता है, तो उसका दिमाग खुलने लगता है और साथ ही उसका कॉन्फिडेंस भी बढ़ने लगता है. उसे अंदर ही अंदर ऐसा महसूस होने लगता है कि घर में उसकी बातों की भी वैल्यू है.
'खुद करने दो' वाला रूल अपनाएं
पेरेंट्स की एक आदत यह भी होती है कि जैसे ही उनका बच्चा किसी भी काम में थोड़ा सा भी अटकता है या फिर उस काम को करने में उसे समय लगता है, वे तुरंत जाकर खुद उसके काम करने लग जाते हैं. अगर आपकी भी यही आदत है, तो सबसे पहले इस आदत को कंट्रोल करना सीखें. जब आपका बच्चा अपने जूते के फीते बांध रहा हो, तो भले ही उसे थोड़ा ज्यादा समय लग जाए, लेकिन उसे ही अपने जूते के फीते बांधने का मौका दें. थोड़ी सी देरी होते ही तुरंत उसकी मदद करने के लिए आगे न बढ़ जाएं. अगर वह आपसे मदद मांगने आ भी जाए, तो पूरा काम खुद करने के बजाय उसे सिर्फ उस काम को करने का सही तरीका सिखाएं.
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