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‘बगावत नहीं, लोकतांत्रिक लड़ाई’:tmc के बागी गुट के विधायक बोले- ममता ही हमारी नेता, पार्टी में टूट नहीं – Mla From Rebel Tmc Faction Says Mamata Our Leader No Split In Party We Are Not Rebellion Is Democratic Battle

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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी सियासी उठापटक के बीच पार्टी के बागी गुट ने बड़ा बयान दिया है। टीएमसी के कई विधायकों ने साफ कहा है कि पार्टी में कोई टूट नहीं हो रही है और वे अब भी ममता बनर्जी को ही अपना नेता मानते हैं। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष को लेकर हुए घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर गहरे मतभेद को खुलकर सामने ला दिया है। बागी विधायकों का कहना है कि उन्होंने पार्टी विरोध नहीं बल्कि प्रक्रिया को पूरा करने के लिए यह कदम उठाया।

टीएमसी विधायक गुलाम रब्बानी ने कहा कि उन्होंने दीदी के निर्देशों का पालन करते हुए दो बार जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की वजह से ही वे आज इस राजनीतिक स्थिति में हैं और उनका भरोसा आज भी ममता पर कायम है। रब्बानी ने कहा कि जब नेता प्रतिपक्ष की प्रक्रिया अटक गई, तब ऋतब्रत बनर्जी का नाम सामने आया। इसके बाद विधायकों ने मिलकर सहमति बनाई कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाना सही फैसला होगा। इसी आधार पर दस्तावेज जमा किए गए और मान्यता हासिल की गई।

ये भी पढ़ें- टीएमसी में बड़ी टूट: बागी गुट ने ऋतब्रत को चुना नेता विपक्ष, दीदी को मुख्य सलाहकार पद का प्रस्ताव

क्या टीएमसी में टूट की स्थिति बन रही है?

टीएमसी विधायक रियात हुसैन सरकार ने साफ कहा कि पार्टी नहीं टूटेगी। उन्होंने कहा कि सभी विधायक टीएमसी के चुनाव चिह्न पर जीतकर आए हैं और ममता बनर्जी की तस्वीर के साथ चुनाव लड़ा था। उनके मुताबिक, किसी तरह की बगावत या पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं चल रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने पहले शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष चुना था, लेकिन प्रक्रिया कहीं अटक गई थी। इसलिए विधायकों ने आगे बढ़कर उस प्रक्रिया को पूरा किया।

 

क्या अलग गुट बनाना सिर्फ तकनीकी फैसला था?

टीएमसी विधायक अखरुज्जमान ने कहा कि पूरी समस्या तकनीकी गलती की वजह से पैदा हुई। उन्होंने बताया कि करीब 60 विधायकों ने मिलकर टीएमसी के भीतर अलग समूह बनाने का फैसला लिया और नियमों के मुताबिक स्पीकर को प्रस्ताव सौंपा। उनके मुताबिक, यह सिर्फ प्रक्रिया और प्रोटोकॉल का मामला था। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के खिलाफ किसी तरह की नाराजगी नहीं है और वे चाहते हैं कि ममता बनर्जी ही उनकी मुख्य सलाहकार बनी रहें।

क्या स्पीकर की मान्यता से बढ़ा विवाद?

टीएमसी विधायक जावेद अहमद खान ने कहा कि 58 विधायकों की सूची स्पीकर को सौंपी गई थी। सभी नामों की जांच और औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पीकर ने मान्यता दी। उन्होंने कहा कि यह किसी की कृपा नहीं थी बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार था। जावेद खान ने कहा कि अगर 80 में से 60 विधायक एक साथ किसी नेता को चुनते हैं तो वही लोकतंत्र की असली भावना है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक माहौल जरूरी है।

क्या बोले टीएमसी के नेता…

कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी सियासी घमासान के बीच पार्टी नेता मदन मित्रा ने बागी विधायकों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग ममता बनर्जी को नेता मानने की बात कर रहे हैं, वही पार्टी के खिलाफ अलग गुट बना रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसे लोगों के पास अब कोई पार्टी नहीं बची है। फिरहाद हकीम के मेयर पद से इस्तीफे पर उन्होंने कहा कि हकीम ने पद छोड़ने की इच्छा जताई थी, जिसे पार्टी ने मंजूरी दे दी। वहीं अभिषेक बनर्जी को ईडी के समन पर मदन मित्रा ने कहा कि चिट्ठियां आती रहेंगी, नहीं तो पोस्ट ऑफिस कैसे चलेगा।

बागियों पर कुनाल घोष का बड़ा बयान

तृणमूल कांग्रेस नेता कुनाल घोष ने पार्टी में चल रही राजनीतिक उठापटक के बीच साफ कहा कि “ममता बनर्जी मतलब टीएमसी”। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी कार्यकर्ता ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं। घोष ने आरोप लगाया कि कुछ विधायक टीएमसी के चुनाव चिन्ह और ममता बनर्जी की तस्वीर के सहारे चुनाव जीतने के बाद अब दूसरे खेमे के प्रभाव में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि ये विधायक निर्दलीय नहीं हैं बल्कि टीएमसी के उम्मीदवार थे। कुनाल घोष ने सवाल उठाया कि अगर वे सच में ममता बनर्जी का सम्मान करते हैं तो फिर शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष मानने में दिक्कत क्यों है।

बागी विवाद पर चुनाव आयोग जाने के सवाल पर क्या बोले कुनाल घोष?

पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर जारी बगावत के बीच जब कुनाल घोष से पूछा गया कि क्या पार्टी इस मामले को चुनाव आयोग तक ले जाएगी, तो उन्होंने फिलहाल कोई स्पष्ट जवाब देने से इनकार कर दिया। घोष ने कहा कि इस मुद्दे में कई कानूनी पहलू जुड़े हुए हैं और उन सभी पर पहले विस्तार से विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि अभी इस पर सार्वजनिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। टीएमसी के भीतर जारी सियासी संकट और बागी विधायकों की गतिविधियों के बीच पार्टी नेतृत्व लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

क्या ममता बनर्जी अब भी बागी गुट की सबसे बड़ी नेता हैं?

बागी गुट के लगभग सभी विधायकों ने ममता बनर्जी के प्रति सम्मान जताया। नेताओं ने कहा कि वे ममता बनर्जी को मां जैसा मानते हैं और चाहते हैं कि वह पार्टी की मुख्य सलाहकार बनी रहें। हालांकि, कई विधायकों ने पार्टी के अंदर फैसले लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि अब विधायकों की सामूहिक राय को महत्व दिया जाना चाहिए।

 

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