Prostate Cancer Symptoms: उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में पेशाब से जुड़ी कुछ परेशानियां आम हो जाती हैं. बार-बार पेशाब आना, रात में कई बार उठना या पेशाब की धार कमजोर होना जैसी दिक्कतों को अक्सर बढ़ती उम्र का सामान्य असर मान लिया जाता है. लेकिन हर बार ऐसा होना जरूरी नहीं है. कुछ मामलों में लगातार बने रहने वाले बदलावों की वजह जानना जरूरी हो सकता है.
प्रोस्टेट कैंसर को लेकर जागरूकता इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि शुरुआती दौर में कई पुरुषों में इसके कोई साफ लक्षण दिखाई नहीं देते. वहीं, पेशाब से जुड़ा हर लक्षण कैंसर का संकेत भी नहीं होता. ऐसे में सही जानकारी और समय पर डॉक्टर की सलाह सबसे ज्यादा जरूरी हो जाती है.
डॉ. राजीव सूद, Principal Director, Urology Sciences & Andrology, Pacific OneHealth Hospital, New Delhi, बताते हैं कि पुरुषों को किसी भी urinary symptom को देखकर तुरंत घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लगातार हो रहे बदलावों को नजरअंदाज करना भी सही नहीं है. उनके मुताबिक, लक्षणों का सही कारण जांच के बाद ही पता चल सकता है.
पेशाब की परेशानी का मतलब हमेशा प्रोस्टेट कैंसर नहीं
पुरुषों में उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट ग्लैंड का आकार बढ़ना यानी Benign Prostatic Hyperplasia (BPH) काफी आम समस्या है. इसकी वजह से पेशाब शुरू करने में परेशानी, पेशाब की धार कमजोर होना, बार-बार टॉयलेट जाना या रात में कई बार उठना जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.
इसके अलावा Urinary Infection, Prostatitis, Overactive Bladder और Diabetes जैसी स्थितियां भी बार-बार पेशाब आने या अचानक पेशाब लगने की वजह बन सकती हैं. इसलिए केवल इन लक्षणों के आधार पर प्रोस्टेट कैंसर मान लेना सही नहीं होगा.
फिर कब प्रोस्टेट कैंसर को लेकर सतर्क होना चाहिए?

प्रोस्टेट कैंसर की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि शुरुआती स्टेज में कई पुरुषों में कोई खास लक्षण नहीं दिखते. इसलिए केवल पेशाब से जुड़ी परेशानी आने का इंतजार करना पर्याप्त नहीं है.
बीमारी बढ़ने पर कुछ पुरुषों में पेशाब करने में दिक्कत, पेशाब की कमजोर धार या बार-बार पेशाब आने जैसी समस्या दिखाई दे सकती है. कुछ मामलों में पेशाब या वीर्य में खून भी नजर आ सकता है.
लगातार कमर के निचले हिस्से, कूल्हे या पेल्विक एरिया में दर्द भी एक ऐसा संकेत है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. हालांकि, इन लक्षणों का संबंध दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से भी हो सकता है. इसलिए किसी भी लक्षण को देखकर खुद से कैंसर का निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं है.
उम्र और Family History पर भी दें ध्यान
प्रोस्टेट कैंसर का खतरा उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है. इसके अलावा अगर परिवार में पिता या भाई को प्रोस्टेट कैंसर रहा है, तो व्यक्ति का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है.
ऐसे पुरुषों को अपने डॉक्टर से स्क्रीनिंग को लेकर समय पर बात करनी चाहिए. डॉक्टर उम्र, पारिवारिक इतिहास और दूसरे जोखिम कारकों को देखते हुए आगे की जांच की जरूरत तय कर सकते हैं.
PSA टेस्ट को लेकर ये बात समझना जरूरी
प्रोस्टेट कैंसर की जांच की बात आते ही PSA टेस्ट का नाम सबसे पहले सामने आता है. लेकिन PSA का बढ़ा हुआ स्तर अपने आप कैंसर की पुष्टि नहीं करता.
प्रोस्टेट का बढ़ना या Prostatitis जैसी दूसरी स्थितियां भी PSA बढ़ा सकती हैं. वहीं, सामान्य PSA रिपोर्ट आने का मतलब यह भी नहीं है कि कैंसर की संभावना हर स्थिति में पूरी तरह खत्म हो गई है.
इसी वजह से स्क्रीनिंग का फैसला व्यक्ति की उम्र, Family History, Symptoms और overall health को ध्यान में रखकर डॉक्टर की सलाह से करना बेहतर होता है.
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें

अगर पेशाब से जुड़ी कोई नई समस्या शुरू हुई है और वह लगातार बनी हुई है या धीरे-धीरे बढ़ रही है, तो इसे सिर्फ उम्र का असर मानकर टालना ठीक नहीं है. खास तौर पर इन बदलावों पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है.
- पेशाब की धार में लगातार बदलाव.
- पेशाब शुरू करने में परेशानी.
- रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना.
- पेशाब में खून आना.
- बिना किसी स्पष्ट वजह के वजन कम होना.
- कमर, कूल्हे या पेल्विक हिस्से में लगातार दर्द.
डॉक्टर किन जांचों की सलाह दे सकते हैं?
डॉक्टर सबसे पहले आपकी समस्या, मेडिकल हिस्ट्री और परिवार में कैंसर के इतिहास के बारे में जानकारी लेते हैं. इसके बाद जरूरत के हिसाब से Urine test, Prostate examination और PSA जैसी जांच कराई जा सकती हैं.
कुछ मामलों में आगे MRI जैसी जांच की जरूरत पड़ सकती है. अगर जांच के बाद कैंसर का संदेह बना रहता है, तो biopsy के जरिए इसकी पुष्टि करने में मदद मिल सकती है.
हर Urinary Symptom को कैंसर न समझें, लेकिन नजरअंदाज भी न करें
प्रोस्टेट से जुड़ी समस्या को लेकर सबसे जरूरी बात यही है कि न तो हर urinary symptom को कैंसर मानकर डरें और न ही लगातार हो रहे बदलावों को उम्र का सामान्य असर समझकर छोड़ दें.
डॉ. राजीव सूद के अनुसार, Prostate health को लेकर जागरूक रहना और जरूरत पड़ने पर समय पर Urologist से सलाह लेना बेहतर तरीका है. सही समय पर जांच कराने से समस्या की असली वजह समझने और जरूरत पड़ने पर इलाज शुरू करने में मदद मिल सकती है.
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