
Johnson & Johnson compensation: करीब 76,000 दावों से जुड़ा यह ऐतिहासिक समझौता एक दशक से जारी कानूनी विवाद पर विराम लगा सकता है. जॉनसन एंड जॉनसम ने कहा है कि वह अपन् बेबी पाउडर और अन्य उत्पादों से ओवेरियन कैंसर होने के आरोपों से जुड़े हजारों मुकदमों के निपटारे के लिए करीब 5.5 अरब डॉलर यानि भारतीय रुपये के हिसाब से 52,639 करोड़ का भुगतान करेगी. यह एक ऐतिहासिक समझोता है, जिससे पिछले एक दश्क से चली आ रही विवादास्पद कानूनी लड़ाई खत्म होने की संभावना है.
कंपनी ने क्या कहा?
कंपनी ने बताया कि यह समझौता करीब 76,000 दावों को कवर करता है. इनमें न्यू जर्सी की संघीय अदालत में एक साथ सुने जा रहे मामले और विभिन्न राज्य अदालतों में लंबित संबंधित मुकदमे शामिल हैं. कंपनी का कहना है कि यह समझोते उसके खिलाफ बचे हुए लगभग लभी टैल्क संबंधी दावों का प्रतिनिधित्व करता है.

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क्या था आरोप?
जॉनसन एंड जॉनसन पर आरोप था कि उसके टैल्क पाउडर में एस्बेस्टस था, जिससे मेसोथेलियोमा और ओवेरियन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हुई. करीब 20 साल बाद वकीलों ने इस समझौते पर ध्यान दिया. कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट एरिक हास ने कहा कि ये आरोप बेबुनियाद हैं, लेकिन लंबे विवाद को खत्म करने के लिए कंपनी समझौता कर रही है.
कितना मिलेगा मुआवजा?
जॉनसन एंड जॉनसन 2027 में 3 अरब डॉलर यानि भारतीय रुपये के हिसाब से 28,680 करोड़ और 2028 में बाकी राशि का भुगतान करेगी. हालांकि, अगर अधिक लोग इस समझौते में शामिल होते हैं, तो कुल भुगतान 7 अरब डॉलर यानि भारतीय रुपये के हिसाब से 66,920 या उससे ज्यादा भी हो सकता है. समझौते के तहत ओवेरियन कैंसर से जुड़े पात्र दावों पर मुआवजा दिया जाएगा, लेकिन कंपनी के कुल भुगतान की कोई तय सीमा नहीं है.
बंद हो गया बेबी पाउडर
जॉनसन एंड जॉनसन का कहना है कि उसके टैल्क उत्पाद सुरक्षित थे और उनमें एस्बेस्टस नहीं था. कंपनी ने 2020 में अमेरिका में टैल्क वाला बेबी पाउडर बेचना बंद कर दिया, लेकिन 2025 में कानूनी विवाद फिर शुरू हो गया, क्योंकि दिवालिया प्रक्रिया के जरिए मामलों का निपटारा करने की उसकी कोशिश सफल नहीं हो सकी.
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