केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पाकिस्तान स्थित शाहजाद भट्टी नेटवर्क यानी एसबीएन को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए के तहत आतंकी संगठन घोषित किया है। गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के विजन के तहत की गई है। मंत्रालय के अनुसार, नेटवर्क सीमा पार से हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थों की तस्करी के अलावा युवाओं और छोटे अपराधों में शामिल लोगों को आतंकवाद की ओर धकेलने में शामिल रहा है।
शाहजाद भट्टी नेटवर्क को आतंकी संगठन क्यों घोषित किया गया?
केंद्र का मानना है कि शाहजाद भट्टी नेटवर्क आतंकवाद में शामिल रहा है और भारत में आतंकवादी गतिविधियों के विभिन्न मामलों में उसकी भागीदारी रही है। मंत्रालय ने कहा कि नेटवर्क का कथित उद्देश्य युवाओं और स्थानीय अपराधियों को लालच देकर अपने साथ जोड़ना, उन्हें भारत विरोधी गतिविधियों के लिए प्रेरित करना और सीमा पार से हथियार, विस्फोटक तथा मादक पदार्थों की तस्करी करना रहा है। इसके जरिए देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, सामाजिक-सांप्रदायिक सौहार्द और आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करने का आरोप लगाया गया है।
यूएपीए के तहत अब इस नेटवर्क पर क्या कार्रवाई हुई?
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी राजपत्र अधिसूचना में यूएपीए की धारा 35(1)(ए) का इस्तेमाल किया गया है। इसके तहत शाहजाद भट्टी नेटवर्क को यूएपीए की पहली अनुसूची में शामिल किया गया है। इस सूची में उन संगठनों के नाम होते हैं जिन्हें भारतीय कानून के तहत आतंकी संगठन घोषित किया गया है। अधिसूचना के मुताबिक शाहजाद भट्टी नेटवर्क इस सूची में शामिल होने वाला 46वां संगठन है। यानी अब एसबीएन को औपचारिक तौर पर भारतीय कानून के तहत आतंकी संगठन का दर्जा मिल गया है।
नेटवर्क पर युवाओं को आतंक की ओर धकेलने का क्या आरोप है?
शाहजाद भट्टी नेटवर्क कथित तौर पर युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाने के लिए लालच और दूसरे तरीकों का इस्तेमाल करता था। नेटवर्क पर छोटे अपराधों में शामिल स्थानीय लोगों को भी आतंकवादी गतिविधियों के लिए प्रेरित करने का आरोप है। मंत्रालय ने कहा कि एसबीएन दूसरे प्रतिबंधित संगठनों और इसी तरह नामित संस्थाओं के साथ मिलकर भारत विरोधी गतिविधियों के लिए संसाधन जुटाने में भी शामिल रहा है। नेटवर्क पर हिंसक गतिविधियों के जरिए सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने का आरोप भी लगाया गया है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किस तरह किया गया?
गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि नेटवर्क ने विभिन्न डिजिटल संचार प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कथित तौर पर भड़काऊ संदेश फैलाने के लिए किया। मंत्रालय के अनुसार, एसबीएन ने नफरत फैलाने वाली डिजिटल सामग्री भी प्रकाशित की। सरकार का कहना है कि ऐसी गतिविधियां देश की एकता और आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा करती हैं। अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि नेटवर्क हिंसक गतिविधियों के जरिए आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा था और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल लोगों को प्रभावित करने तथा भड़काऊ संदेश फैलाने के लिए किया गया।
किन मामलों में नेटवर्क से जुड़े लोगों पर कार्रवाई हुई?
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गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कथित एसबीएन सदस्यों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का भी उल्लेख किया गया है। इन मामलों में यूएपीए, भारतीय न्याय संहिता, आर्म्स एक्ट, एक्सप्लोसिव्स एक्ट, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से जुड़े कानूनों के तहत मामले शामिल हैं।
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इससे पहले अगस्त में सुरक्षा एजेंसियों ने भी नेटवर्क के खिलाफ कई राज्यों में कार्रवाई की थी। गृह मंत्रालय के मुताबिक, 14 राज्यों में चलाए गए अभियान के दौरान 253 लोगों को हिरासत में लिया गया था। नेटवर्क से जुड़े मामलों में 80 से अधिक एफआईआर और 200 से ज्यादा गिरफ्तारियों की जानकारी दी गई थी।
तलाशी में क्या-क्या बरामद होने की बात सामने आई?
- जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने आईईडी, पिस्तौल, जिंदा कारतूस, पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री के निशान वाले ग्रेनेड और निगरानी के लिए इस्तेमाल होने वाले सीसीटीवी कैमरे बरामद किए जाने की जानकारी दी थी। गृह मंत्रालय की ताजा कार्रवाई के बाद शाहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का दायरा और बढ़ गया है।
- सरकार का कहना है कि संगठन की गतिविधियां भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, सांप्रदायिक सौहार्द और आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रही थीं। यूएपीए की पहली अनुसूची में शामिल किए जाने के बाद एसबीएन अब भारतीय कानून के तहत प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की सूची में औपचारिक रूप से शामिल हो गया है।


