नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने कई गांवों में सबकुछ तबाह कर दिया. गांव, बाजार बह गए. अब तक 165 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. एक हजार से अधिक लोग लापता हैं. इसमें 300 से अधिक भारतीय शामिल हैं. नेपाल में बाढ़ के हालात को जानने के लिए एबीपी न्यूज़ की टीम बैरेनी पहुंची. जहां लोगों ने दिल दहला देने वाली कहानी बताई.
त्रिशूली रिवर प्वाइंट से करीब 32 किलोमीटर दूर बैरेनी में जहां पूरे हाईवे पर सैलाब आया, वहां के लोगों का कहना है कि इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ, क्योंकि यहां आस-पास कोई नदी भी नहीं है. लोगों ने बताया कि घरों और दुकानों में सैलाब का मलबा घुस आया. सैलाब सब कुछ बहाता ले गया. लोगों ने बताया कि मलबा जिस रास्ते से आया, उसी से वापस भी चला गया. आपदा के बाद बुलडोजर से हाईवे के बीच से मलबा हटाया जा रहा है.
लाशें बहकर आ रही थी- बाढ़ पीड़ित
बाढ़ पीड़ित ने बताया कि ऊपर से पानी आया, लाशें बहकर आ रही थी. गाड़ियां बह रही थी. हमलोग पहाड़ी पर चले गए थे. इसलिए बच गए. जानवर यही छोड़कर गए थे, ज्यादातर बह गए.
एक अन्य शख्स ने बताया कि ऐसा कभी नहीं देखा. लोग कह रहे हैं कि चीन का डैम टूटा इसलिए ऐसा हुआ. सैलाब बहुत ज्यादा था, लोग भाग रहे थे. जान चली जाती.
#WATCH | नेपाल में तबाही की कहानी सुनिए चश्मदीदों की जुबानी@romanaisarkhan | @ReporterAnkitGhttps://t.co/SMm0dUypVm#Nepal #Flood #Disaster #GroundReport #ABPNews pic.twitter.com/g2v6zQNCUF
— ABP News (@ABPNews) August 27, 2026
एक अन्य ने एबीपी न्यूज को बताया, ”घर बह गए हैं. यहां सभी पुल बह गए, त्रिशुली बाजार के पास 40 पुल बह गए. त्रिशुली बाजार बह गया, देवी घाट भी बह गया. स्कूल भी था, वो भी बह गया. देवी घाट से आगे रास्ता ही नहीं है.”
बाढ़ प्रभावित एक अन्य ने कहा कि कभी ऐसा नहीं देखा. हाईवे पूरा बह गया. त्रिशुली हाईवे पूरा बंद है.
कैसे आई बाढ़?
बाढ़ ने सबसे पहले चीन-नेपाल की सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी के पास तिमुरे को अपनी चपेट में लिया. रसुवागढ़ी से करीब 20 किलोमीटर ऊपर हिमस्खलन की वजह से ल्हेंदे नदी का बहाव रुक गया और बाढ़ आ गई.
तबाही के बाद भारत ने नेपाल को मदद भेजी. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को फोन किया और मदद का आश्वासन दिया. इसके बाद भारतीय वायुसेना मदद की सामग्री लेकर नेपाल पहुंची है.


