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दुर्गा पूजा में धुनुची नाच क्यों किया जाता है? जानें इसके पीछे की परंपरा

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Dhunuchi Dance in Durga Puja: दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों में ढाक की आवाज, धुनुची से उठता धुआं और उसके साथ थिरकते लोगों का नजारा अलग ही माहौल बना देता है. खासकर बंगाल की दुर्गा पूजा में धुनुची नाच का अपना खास महत्व है. हाथ में मिट्टी का धुनुची पात्र लेकर लोग ढाक की ताल पर नाचते हैं.

कई जगहों पर धुनुची नाच प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दुर्गा पूजा में धुनुची नाच क्यों किया जाता है और इसकी शुरुआत कैसे हुई. आइए जानते हैं इसके पीछे की परंपरा क्या है. 

क्या होती है धुनुची?

धुनुची मिट्टी से बना एक खास तरह का पात्र होता है. इसमें आमतौर पर नारियल का छिलका या कोयला जलाकर उसके ऊपर धूप या दूसरी सुगंधित सामग्री डाली जाती है. इससे धुआं निकलता है. पूजा के दौरान इसी धुनुची को हाथ में लेकर देवी के सामने नृत्य किया जाता है. इसे सिर्फ नृत्य की तरह नहीं देखा जाता, बल्कि पूजा के माहौल का हिस्सा माना जाता है.

धुनुची नाच का क्या है धार्मिक महत्व?

दुर्गा पूजा में धूप और धुनो का इस्तेमाल देवी की पूजा के दौरान वातावरण को सुगंधित करने के लिए किया जाता है. धुनुची में जलने वाली सामग्री से निकलने वाले धुएं को पूजा की रस्म का हिस्सा माना जाता है.

धुनुची नाच (Dhunuchi Dance) इसी पूजा परंपरा से जुड़ा हुआ है. मान्यता के अनुसार, देवी के सामने धुनुची अर्पित करते हुए नृत्य करना भक्ति और श्रद्धा व्यक्त करने का एक तरीका है. हालांकि, अलग-अलग परिवारों और पूजा समितियों में इससे जुड़ी मान्यताएं थोड़ी अलग हो सकती हैं.

PC: AI Generated
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ढाक की ताल पर क्यों किया जाता है नृत्य?

धुनुची नाच में ढाक की भूमिका भी काफी खास होती है. ढाक की तेज और लयबद्ध आवाज के साथ धुनुची लेकर लोग नृत्य करते हैं. इसकी वजह से पूजा पंडाल का माहौल और ज्यादा उत्साहपूर्ण हो जाता है.

कई जगहों पर लोग एक हाथ में धुनुची लेकर नाचते हैं, जबकि अनुभवी प्रतिभागी एक से ज्यादा धुनुची लेकर भी प्रदर्शन करते हैं. हालांकि, इसमें सावधानी रखना जरूरी है क्योंकि धुनुची में जलती हुई सामग्री होती है.

धुनुची नाच कब किया जाता है?

धुनुची नाच (Dhunuchi Dance in Durga Puja) आमतौर पर दुर्गा पूजा के दौरान संध्या आरती या आरती के आसपास किया जाता है. खासकर विजयादशमी से पहले होने वाली पूजा में इसका माहौल काफी देखने लायक होता है. पंडालों में महिलाएं, पुरुष और युवा सभी इसमें हिस्सा लेते हैं. कई जगहों पर इसे लेकर प्रतियोगिता भी होती है, जिसमें प्रतिभागी ढाक की ताल के साथ अपने नृत्य का प्रदर्शन करते हैं.

Dhunuchi Dance in Durga Puja: परंपरा के साथ जुड़ा है उत्सव का रंग

समय के साथ धुनुची नाच सिर्फ पूजा की एक रस्म तक सीमित नहीं रहा. यह दुर्गा पूजा के उत्सव और सामुदायिक माहौल का भी हिस्सा बन गया है. पंडाल में मौजूद लोग ढाक की ताल पर नाचते प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाते हैं.

यही वजह है कि धुनुची नाच आज भी दुर्गा पूजा की उन परंपराओं में शामिल है, जो पूजा, संगीत, नृत्य और सामूहिक उत्सव को एक साथ जोड़ती हैं.

यह भी पढ़ें: लाल-सफेद साड़ी से गहनों तक, आखिर क्यों खास है बंगाली महिलाओं का दुर्गा पूजा लुक?

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