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‘दुनिया को सिखाएंगे अमेरिका को हराने का हुनर…’, ईरान का बड़ा दांव- SCO देशों के साथ साझा करेगा रक्षा तकनीक

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ईरान ने कहा है कि वह अपनी रक्षा हथियार क्षमताओं को स्वतंत्र देशों, खासकर शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है. यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और युद्ध के हालात बने हुए हैं. वहीं दूसरी ओर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के हालिया प्रस्ताव पर असहमति जताई है, जिससे शांति वार्ता की उम्मीदों को झटका लगा है.

SCO देशों को हथियार साझा करने की पेशकश
ईरान के उप रक्षा मंत्री रेजा तलई-निक ने मंगलवार को कहा कि ईरान अपनी सैन्य और रक्षा अनुभवों को SCO देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के खिलाफ हासिल “अनुभव” को संगठन के अन्य देशों के साथ साझा किया जा सकता है.

अमेरिका-इजरायल के खिलाफ संघर्ष का दावा
ईरान ने बताया कि उसने हाल ही में अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष में ड्रोन और मिसाइल हमलों का इस्तेमाल किया. ईरान ने दावा किया कि उसने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायली स्थानों को निशाना बनाया, साथ ही अपने हवाई क्षेत्र में अमेरिकी ड्रोन भी गिराए. तलई-निक ने यह बयान किर्गिस्तान की राजधानी में आयोजित SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान दिया. उन्होंने कहा कि ईरान संगठन के सदस्य देशों के साथ रक्षा सहयोग को मजबूत करना चाहता है.

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रूस और बेलारूस से बातचीत
ईरानी अधिकारी ने हाल ही में रूस और बेलारूस के रक्षा अधिकारियों के साथ भी बातचीत की है. इन देशों ने ईरान के साथ सहयोग जारी रखने की इच्छा जताई है. हालांकि युद्ध पर फिलहाल अस्थायी युद्धविराम लागू है, लेकिन दो महीने से चल रहे इस संघर्ष को समाप्त करने की कोशिशें अभी भी अटकी हुई हैं.

ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव पर जताई नाराजगी
अमेरिकी अधिकारी के अनुसार,  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के हालिया प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं. यह प्रस्ताव युद्ध समाप्त करने और फारस की खाड़ी में शिपिंग विवाद सुलझाने के बाद ही परमाणु मुद्दों पर चर्चा करने की बात करता है.

अमेरिका की शर्तें
अमेरिका का कहना है कि परमाणु मुद्दों पर बातचीत शुरुआत से ही होनी चाहिए, न कि बाद में. इसी कारण ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया. इस तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, महंगाई बढ़ी है और हजारों लोगों की जान भी जा चुकी है. फिलहाल दोनों देशों के बीच समाधान की संभावना कमजोर नजर आ रही है.

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