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ताइवान में भारतीय मजदूरों की एंट्री पर सस्पेंस, सरकार ने रखीं दो बड़ी शर्तें

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Taiwan Indian Migrant Workers: ताइवान सरकार ने मंगलवार को कहा कि भारतीय प्रवासी मजदूरों को लाने की योजना तभी आगे बढ़ेगी, जब स्थानीय उद्योगों की मांग होगी और भारत तय शर्तों को पूरा करेगा. सरकार ने साफ कर दिया है कि दोनों शर्तें पूरी नहीं होने पर इस योजना को लागू नहीं किया जाएगा.

ताइवान इस समय घटती जन्मदर और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी की समस्या से जूझ रहा है. इसी कारण वह इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे देशों के अलावा नए देशों से भी मजदूर लाने के विकल्प तलाश रहा है. ताइपे और नई दिल्ली के बीच फरवरी 2024 में एक समझौता (MoU) साइन किया गया था, जिसके तहत ताइवान में भारतीय कामगारों की भर्ती की योजना बनाई गई.

पायलट प्रोजेक्ट की योजना
ताइवान के श्रम मंत्री हंग सुन-हान ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि पायलट प्रोग्राम के तहत इस साल करीब 1,000 भारतीय मजदूर ताइवान आ सकते हैं. हालांकि इस योजना को लेकर राजनीतिक और आम जनता के बीच विरोध बढ़ गया है, जिससे सरकार अब सतर्क नजर आ रही है. मंगलवार को संसद में सवाल-जवाब के दौरान श्रम मंत्री हंग सुन-हान ने कहा, “अगर इंडस्ट्री की मांग और भारत की शर्तें पूरी नहीं होती हैं, तो मजदूरों को लाने का सवाल ही नहीं उठता.” उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है. “सुरक्षा हमारे लिए सबसे अहम है और यह टॉप प्रायोरिटी है,” उन्होंने संसद में कहा.

ताइवान में विदेशी मजदूरों की स्थिति
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ताइवान में इस समय 8.7 लाख से ज्यादा विदेशी मजदूर काम कर रहे हैं. इनमें से 60% से अधिक लोग मैन्युफैक्चरिंग, निर्माण, कृषि और केयरगिविंग सेक्टर में कार्यरत हैं. इस योजना का विरोध मुख्य विपक्षी पार्टी कुओमिन्तांग (KMT) के नेताओं ने किया है. उनका कहना है कि इससे महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है.

लापता मजदूरों को लेकर चिंता
KMT सांसद वांग हुंग-वेई ने कहा कि ताइवान में ऐसे कई प्रवासी मजदूर हैं, जिनका प्रशासन से संपर्क टूट चुका है. उन्होंने इसे “ब्लैक होल” जैसी स्थिति बताया. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के अंत तक 93,000 से ज्यादा विदेशी मजदूर “लापता” बताए गए हैं, लेकिन वे अभी भी ताइवान में मौजूद हैं. इस योजना को अनिश्चितकाल के लिए रोकने की मांग करते हुए एक याचिका दायर की गई है, जिस पर 42,000 से ज्यादा लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं. वहीं, ताइपे में भारत के प्रतिनिधि कार्यालय ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.

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