बॉलीवुड के जाने-माने फिल्ममेकर विशाल भारद्वाज पिछली बार शाहिद कपूर स्टारर फिल्म ‘ओ रोमियो’ लेकर आए थे. अब वो अपनी अगली फिल्म को लेकर चर्चा में हैं. विशाल भारद्वाज एक पॉपुलर और विवादित मामले पर फिल्म बनाने की तैयारी कर रहे हैं. वो एक्स ‘तहलका’ एडिटर तरुण तेजपाल से जुड़े 2013 के यौन उत्पीड़न मामले पर फिल्म बना रहे हैं.
एक ही घटना को अलग-अलग नजरिए से दिखाएंगे विशाल भारद्वाज
वैरायटी की रिपोर्ट के मुताबिक, विशाल भारद्वाज अब तरुण तेजपाल से जुड़े 2013 के मामले पर फिल्म बना रहे हैं. फिल्म की कहानी ‘राशोमोन’ स्टाइल में दिखाई जाएगी, जिसमें एक ही घटना को अलग-अलग लोगों के नजरिए से पेश किया जाता है. विशाल का मानना है कि इस मामले से जुड़े कई ऐसे पहलू हैं, जिनके बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है.
कोर्ट के फैसलों के अंतर ने दिया फिल्म बनाने का आइडिया
विशाल भारद्वाज ने गोवा ट्रायल कोर्ट के 527 पन्नों वाले फैसले को कई बार पढ़ा है. वो इस मामले की सुनवाई के दौरान गोवा में भी मौजूद थे और उन्होंने पूरी कार्यवाही को करीब से देखा. विशाल के मुताबिक, ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट के फैसलों में अंतर ने उन्हें इस मामले पर फिल्म बनाना का आइडिया दिया.
ये फिल्म देखकर दर्शक हैरान हो जाएंगे…
विशाल भारद्वाज ने कहा, ‘दोनों फैसलों में काफी अंतर है और यही बात इस कहानी को ‘राशोमोन’ स्टाइल में दिखाने के लिए खास बनाती है. इस मामले में कई ऐसी बातें और घटनाएं हैं, जिनके बारे में लोगों को पता नहीं है. जब ये सब स्क्रीन पर दिखेगा, तो दर्शक हैरान हो सकते हैं. असली बात अक्सर छोटी-छोटी चीजों में छिपी होती है. 500 से ज्यादा पन्नों के कोर्ट के फैसले को पढ़ना और उसकी कानूनी भाषा समझना हर किसी के लिए आसान नहीं है. मैंने इस फैसले को कई बार पढ़ा है और अभी भी इसके अलग-अलग पहलुओं को समझने की कोशिश कर रहा हूं. ये समाज के लिए एक बहुत जरूरी मामला है.’


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विशाल ने ये भी बताया कि फिल्म को इस तरह से पेश करना क्यों जरूरी है. उन्होंने कहा, ‘किसी भी कहानी को समझने के लिए अलग-अलग नजरिए जरूरी होते हैं, खासकर ‘राशोमोन’ स्टाइल की कहानी में. जैसे आधा भरा गिलास एक नजरिए से आधा खाली भी हो सकता है, बस फर्क देखने के तरीके का है. मैं चाहता हूं कि अगर संभव हो तो एक्टर को अपराध के बारे में पहले से जानकारी न हो और वो कोर्ट के फैसलों को भी एक तरफ रखे. मैं चाहूंगा कि वो इस कहानी को एक फिक्शन के तौर पर समझे.’

क्या है ‘राशोमोन’ स्टाइल?
‘राशोमोन’ एक खास तरह की कहानी कहने की तकनीक है, जिसमें एक ही घटना को अलग-अलग किरदारों या गवाहों के नजरिए से दिखाया जाता है. हर व्यक्ति की कहानी दूसरे से अलग हो सकती है और इसी वजह से दर्शक ये समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर सच क्या है. इस तकनीक का नाम जापानी फिल्ममेकर अकीरा कुरोसावा की साल 1950 में आई फिल्म ‘राशोमोन’ से जुड़ा है.
क्या है तरुण तेजपाल मामला?
साल 2013 में तरुण तेजपाल पर गोवा के एक पांच सितारा होटल में अपनी जूनियर महिला सहयोगी के साथ रेप और गलत व्यवहार करने के आरोप लगे थे. ये मामला ‘थिंकफेस्ट’ के दौरान का है. महिला ने आरोप लगाया था कि 7 नवंबर, 2013 को होटल की लिफ्ट में उनके साथ रेप किया गया था. उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि अगले दिन भी उनके साथ दोबारा ऐसी हरकत करने की कोशिश की गई थी.
इस मामले में तेजपाल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 354A, 354B, 341 और 342 के तहत मामला दर्ज किया गया था. हालांकि, मई 2021 में गोवा की फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने उन्हें रेप और यौन उत्पीड़न के आरोपों से बरी कर दिया था. अदालत ने सबूतों की कमी के चलते ये फैसला सुनाया था.
तरुण तेजपाल को सुनाई 10 साल की सजा
अब हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया है. अदालत ने उन्हें रेप के मामले में 10 साल की सजा और 5 लाख रुपये का जुर्माना सुनाया है. इसके अलावा अन्य धाराओं के तहत भी अलग-अलग सजा और जुर्माना लगाया गया है.
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