डीवीएसी ने पूर्व मंत्री केएन नेहरू को मुख्य आरोपी और 12 अन्य लोगों को 1,020 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में एफआईआर दर्ज की है। इस मामले में सरकारी टेंडर में बड़ी गड़बड़ी और रिश्वत लेने का आरोप है।
क्या आरोप है?
एफआईआर में डीएमके नेता के भाइयों और डीएमके के दो पूर्व विधायकों एस. सुदर्शनम और जे.जे. एबेनेजर का नाम शामिल है। उन पर आरोप है कि उन्होंने ठेकेदारों की सिफारिश की, टेंडर की जानकारी साझा की। इसके साथ ही कथित तौर पर रिश्वत की रकम का हिसाब-किताब किया।
सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी निदेशालय के दस्तावेज में दावा किया गया है कि डीएमके नेता ने वरिष्ठ नौकरशाहों तक पहुंचने में मदद की और टेंडर देने की प्रक्रिया को प्रभावित किया।
दस्तावेज में क्या बताया गया है?
दस्तावेज में आरोप लगाया गया है कि नगर प्रशासन और जलापूर्ति विभाग के पूर्व मंत्री ने अपने भाइयों को अपने करीबी सहयोगी के साथ मिलकर ठेकेदारों और सरकारी कर्मचारियों से पार्टी फंड के नाम पर अवैध पैसे वसूलने की इजाजत दी थी।
कितने करोड़ रुपये का फायदा उठाया गया है?
इसमें कहा गया है कि इस तरह 1,020 करोड़ रुपये का अवैध फायदा उठाया गया। यह अवैध वसूली कॉन्ट्रैक्ट की कुल कीमत के 7.5 से 10 प्रतिशत के बराबर पार्टी फंड के तौर पर की गई थी। प्रवर्तन निदेशालय की 258 पन्नों की रिपोर्ट के आधार पर डीवीएसी की जांच के बाद शुक्रवार को मामला दर्ज किया गया, जिसमें 2021 और 2025 के बीच सरकारी कॉन्ट्रैक्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था।
इसमें कहा गया है कि नेहरू मुख्य आरोपी थे। उनके भाई के.एन. मणिवन्नन और एन. रविचंद्रन अवैध रिश्वत की वसूली और उसे वितरित करने में समन्वय कर रहे थे।
इसमें आगे दावा किया गया कि नेहरू ने अपने भाइयों को अपने करीबी सहयोगी कवि प्रसाद के साथ समन्वय करने की अनुमति दी, ताकि ठेकेदारों और लोक सेवकों से अवैध रिश्वत एकत्र की जा सके, जो कथित तौर पर उन्हें दी जाती थी। इसमें अविनासी और तिरुप्पुर स्थित कुछ फर्मों का नाम भी लिया गया था जिन्होंने पैसा मुहैया कराया था।
कोयंबटूर के नगर नियोजन अधिकारी पर क्या आरोप लगा?
कोयंबटूर के नगर नियोजन अधिकारी और तिरुप्पुर के क्षेत्रीय इंजीनियरों पर भी नगरपालिका कार्यों में मदद करने और रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है। इसमें चेन्नई की एक कंस्ट्रक्शन फर्म के मालिक और पदाधिकारियों के साथ-साथ अज्ञात अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं।
यह दस्तावेज 6 सितंबर, 2021 को सुदर्शनम और प्रसाद के बीच व्हाट्सएप पर हुए बातचीत और एबेनेजर की बातचीत पर आधारित है। यह मामला 3 दिसंबर, 2025 की ईडी रिपोर्ट से शुरू हुआ था। मणिवन्नन के फोन से रसीदें भी बरामद की गईं।


