अमेरिका के पूर्व एफबीआई निदेशक जेम्स कोमी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कथित धमकी देने से जुड़े मामले में नॉर्थ कैरोलिना की अदालत में होने वाली अपनी अगली पेशी रद्द करने की मांग की है। कोमी ने अदालत से कहा है कि वह पहले ही वर्जीनिया में आत्मसमर्पण कर चुके हैं और वहां एक जज के सामने पेश भी हो चुके हैं, इसलिए दोबारा अदालत में पेश होने की जरूरत नहीं है। अमेरिकी न्याय विभाग ने भी उनकी इस मांग का समर्थन किया है।
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जेम्स कोमी के लिए मुसीबत बना इंस्टाग्राम पोस्ट
दरअसल, पिछले सप्ताह जेम्स कोमी पर दो आरोपों वाला मामला दर्ज किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने इंस्टाग्राम पर समुद्र किनारे मिले सीपियों की एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें ’86 47′ अंक बने हुए थे। अभियोजकों का दावा है कि यह पोस्ट राष्ट्रपति ट्रंप को धमकी देने के उद्देश्य से डाली गई थी। ट्रंप अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति हैं, इसलिए ’47’ को उनसे जोड़ा गया।
हालांकि कोमी ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने इस तस्वीर को सिर्फ एक राजनीतिक संदेश के रूप में देखा था, न कि हिंसा के संकेत के तौर पर। उन्होंने बताया कि जब कुछ लोगों ने इसे धमकी के रूप में लेना शुरू किया, तब उन्होंने वह पोस्ट हटा दी थी।
न्याय विभाग द्वारा जेम्स कोमी पर चलाया गया दूसरा मामला
यह मामला ट्रंप प्रशासन के न्याय विभाग द्वारा जेम्स कोमी के खिलाफ चलाया गया दूसरा मामला है। इससे पहले उन पर कांग्रेस से झूठ बोलने का आरोप लगाया गया था, लेकिन अदालत ने वह मामला यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि केस दाखिल करने वाले अभियोजक की नियुक्ति कानूनी तरीके से नहीं हुई थी। इस बीच कई कानूनी विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि क्या न्याय विभाग यह साबित कर पाएगा कि कोमी का इरादा वास्तव में धमकी देने का था। कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने दावा किया है कि जांच एजेंसियों के पास इंस्टाग्राम पोस्ट के अलावा भी सबूत हैं, हालांकि उन्होंने उन सबूतों का खुलासा नहीं किया।
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86-47 का क्या है अर्थ?
अमेरिकी शब्दकोश मेरियम-वेबस्टर के अनुसार ’86’ शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर ‘हटा देना’, ‘निकाल देना’ या ‘सेवा देने से मना करना’ जैसे अर्थों में होता है। हालांकि हाल के वर्षों में कुछ जगहों पर इसका इस्तेमाल ‘मार देना’ के अर्थ में भी देखा गया है, लेकिन यह प्रयोग अभी बहुत सीमित माना जाता है।


