एपल के लिए आईफोन बनाने वाली देश की प्रमुख कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स बड़ी मुश्किल में फंस गई है। तमिलनाडु के होसुर स्थित कंपनी के प्लांट पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आरोप लगाया है कि फैक्टरी से निकलने वाले गंदे पानी ने आसपास के खेतों और कुओं को प्रदूषित कर दिया है। अगर टाटा ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो इस प्लांट की बिजली काटकर इसे बंद किया जा सकता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पूरा विवाद क्या है और इसका एपल की सप्लाई चेन पर क्या असर पड़ सकता है।

1. मामला क्या है और किस प्लांट पर लटकी है तालेबंदी की तलवार?

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स दक्षिण एशिया में ताइवान की फॉक्सकॉन के बाद एपल की दूसरी सबसे बड़ी सप्लायर है। तमिलनाडु के होसुर स्थित इसी प्लांट में आईफोन के बैक पैनल और अन्य अहम पुर्जे बनाए जाते हैं। आसपास के किसानों ने शिकायत की थी कि फैक्टरी का दूषित पानी उनके खेतों और खुले कुओं में मिल रहा है, जिससे उनकी कृषि भूमि को भारी नुकसान हो रहा है।
2. प्रदूषण बोर्ड की जांच में पानी को लेकर क्या चौंकाने वाला खुलासा हुआ?
किसानों की महीनों लंबी शिकायतों के बाद, दिसंबर 2025 से मई 2026 के बीच प्लांट के पांच बार सरकारी निरीक्षण किए गए। 25 मई के नोटिस के अनुसार, जांच में पाया गया कि टाटा ने अपने परिसर के भीतर बने ‘रेनवाटर हार्वेस्टिंग पॉन्ड’ (वर्षा जल संचयन तालाब) में गंदा पानी छोड़ दिया था। यह तालाब ओवरफ्लो हो गया और गंदा पानी आसपास की कृषि भूमि के खुले कुओं के भूजल में जाकर मिल गया।
3. नियामक ने कंपनी को क्या सख्त अल्टीमेटम दिया है?
तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने 25 मई के नोटिस में टाटा से स्पष्टीकरण मांगा है कि नियमों के इस उल्लंघन के आरोप में क्यों न उसकी फैक्टरी की बिजली काट दी जाए और उसे बंद कर दिया जाए,। बोर्ड ने अपने नोटिस में यह भी स्पष्ट किया कि 23 दिसंबर, 2025 को जारी पिछले पत्र के निर्देशों के बावजूद टाटा ने कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाए थे।
4. इन गंभीर आरोपों पर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने क्या सफाई दी है?
इस विवाद पर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपना बचाव करते हुए कहा है कि उसने एक मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से स्वतंत्र जांच कराई है। कंपनी का दावा है कि इस जांच में उसे “सभी नियामक मानदंडों का पूरी तरह से पालन करने वाला” पाया गया है। टाटा ने कहा कि वह पर्यावरण और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है और उसने प्रदूषण अधिकारियों को अपना जवाब सौंप दिया है।
5. एपल और भारत के आईफोन मैन्युफैक्चरिंग लक्ष्य पर इसका क्या असर होगा?
यह मामला भारत के ग्लोबल आईफोन मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की राह में एक चिंताजनक खबर है। चीन से अपना प्रोडक्शन बाहर ले जाने की एपल की रणनीति में टाटा एक अहम कड़ी है। रिसर्च फर्म काउंटरप्वाइंट के मुताबिक, 2026 में दुनिया भर के 26% आईफोन भारत में बनने का अनुमान है, जो चार साल पहले मात्र 6% था। हालांकि, हाल के दिनों में एपल की भारतीय सप्लाई चेन कई समस्याओं का सामना कर रही है, जिसमें सितंबर 2024 में इसी होसुर प्लांट में लगी आग और 2023 में पेगाट्रॉन प्लांट की आग जैसी घटनाएं शामिल हैं।
पर्यावरण मानकों की अनदेखी किसी भी ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए कितनी चुनौतीपूर्ण हो सकती है, होसुर प्लांट का यह मामला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रदूषण बोर्ड टाटा के जवाब और लैब रिपोर्ट से संतुष्ट होता है या फिर आईफोन के निर्माण को शटडाउन का सामना करना पड़ता है।
