Ban on Condom and Dating Apps: चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों के प्रसारण के दौरान एडल्ट श्रेणी के विज्ञापनों पर आपत्ति जताते हुए आईसीसी चेयरमैन जय शाह को पत्र लिखा है. सीटीई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने पत्र में फैमिली व्यूइंग टाइम के दौरान कंडोम, डेटिंग ऐप और अन्य एडल्ट श्रेणी के विज्ञापनों के प्रसारण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है.
सीटीआई ने अपने पत्र में 4 जुलाई 2026 को इंग्लैंड के मैनचेस्टर स्थित ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले गए भारत और इंग्लैंड के दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच का उल्लेख किया है. संगठन के अनुसार मैच के ओवरों के बीच ड्यूरेक्स कंडोम का विज्ञापन प्रसारित किया गया, जबकि करोड़ों लोग अपने परिवार के साथ लाइव मैच देख रहे थे.
अभिभावकों के लिए असहज होती है स्थिति- सीटीआई
सीटीआई का दावा है कि देश में करीब 44 करोड़ लोग क्रिकेट देखते हैं, जिनमें 16 साल से कम आयु के बच्चे भी शामिल हैं. ऐसे में इस तरह के विज्ञापन परिवार के साथ मैच देखने वाले दर्शकों, विशेषकर बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए असहज स्थिति पैदा करते हैं.
पत्र में सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा है कि क्रिकेट भारत में सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा विषय है. उन्होंने पत्र में अपने व्यक्तिगत अनुभव का भी जिक्र करते हुए कहा कि उनका 13 वर्षीय पुत्र भी उनके साथ मैच देख रहा था और कंडोम का विज्ञापन प्रसारित होने के दौरान उसने उससे जुड़े सवाल पूछे, जिससे उनके लिए असहज स्थिति पैदा हो गई. संगठन का कहना है कि ऐसी स्थिति का सामना देशभर में कई परिवारों को करना पड़ता होगा.
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सीटीआई ने ICC से मांग की है कि शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक के फैमिली व्यूइंग टाइम में प्रसारित होने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों के दौरान कंडोम, डेटिंग ऐप और अन्य एडल्ट श्रेणी के विज्ञापनों के प्रसारण पर रोक लगाने संबंधी स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जाए. इसके साथ ही BCCI और ICC के सभी सदस्य बोर्डों से ब्रॉडकास्ट पार्टनर्स के साथ होने वाले अनुबंध में ‘फैमिली व्यूइंग कोड’ को अनिवार्य करने की भी मांग की गई है.
बैन के बाद एडल्ट एड्स दिखाएं तो करें कार्रवाई- सीटीआई
संगठन ने यह भी मांग की है कि भविष्य में यदि इस तरह के विज्ञापन प्रसारित होते हैं तो संबंधित ब्रॉडकास्टर और क्रिकेट बोर्ड के खिलाफ कार्रवाई की जाए. पत्र में कहा गया है कि जब देश में शराब और तंबाकू के विज्ञापनों पर प्रतिबंध है, तो एडल्ट श्रेणी के विज्ञापनों को ओवरों के बीच प्रसारित करने की अनुमति क्यों दी जा रही है.
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सीटीआई ने ICC चेयरमैन जय शाह से अनुरोध किया है कि इस मुद्दे को आगामी ICC बोर्ड बैठक में प्राथमिकता से उठाया जाए और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 30 दिनों के भीतर इस संबंध में ठोस नीति बनाई जाए. संगठन ने कहा है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वह इस मुद्दे को संसद और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के समक्ष भी उठाएगा.

