चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के अनावश्यक जिक्र का भारत ने सख्ती से विरोध किया है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि इस मुद्दे पर भारत की स्थिर स्थिति संबंधित पक्षों को अच्छी तरह मालूम है।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
मंत्रालय ने कहा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमेशा से भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से रहे थे, हैं और हमेशा रहेंगे। इस पर टिप्पणी करने का किसी अन्य देश को कोई अधिकार नहीं है।
सीपीईसी पर जताया कड़ा विरोध
इसके अलावा, भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना का भी कड़ा विरोध किया, क्योंकि इसमें भारत के संप्रभु क्षेत्र आते हैं। मंत्रालय ने कहा कि अन्य देशों की ओर से पाकिस्तान के गैरकानूनी और बलपूर्वक कब्जे को वैधता देने के प्रयास को स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को प्रभावित करता है। यह बात पाकिस्तान और चीन को कई बार स्पष्ट रूप से बताई जा चुकी है।
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मंत्रालय ने कहा, भारत ने ‘सीमा पार जल संसाधन सहयोग’ के संदर्भों को भी देखा है। दोनों देशों (पाकिस्तान-चीन) की कोई साझा सीमा नहीं है, इसलिए इस तरह के कथित सहयोग का सवाल ही नहीं उठता। भारत ने पाकिस्तान और चीन के बीच 1963 के तथाकथित सीमा समझौते को कभी स्वीकार नहीं किया है।
चीन-पाकिस्तान ने बयान में क्या कहा?
चीन और पाकिस्तान ने मंगलवार को आपसी रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने तथा सीपीईसी के तहत परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने पर नई सहमति जताई है। इसके तहत ग्वादर बंदरगाह को एक बड़े क्षेत्रीय संपर्क केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी शामिल है।
दोनों देशों ने कहा कि वे पहले से तय ढांचे के तहत सीपीईसी की परियोजनाओं में तीसरे देशों की भागीदारी का भी स्वागत करते हैं। यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से मुलाकात के बाद जारी किया गया।
इसके अलावा, दोनों पक्षों ने सीपीईसी के उच्च गुणवत्ता वाले विकास को आगे बढ़ाने, ग्वादर बंदरगाह का विस्तार करने और सड़क व बंदरगाह ढांचे के जरिये संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने पर भी सहमति जताई।


