डायबिटीज की दवा का मकसद ब्लड शुगर को नियंत्रित करना और मरीजों को बीमारी की जटिलताओं से बचाना होता है। लेकिन अब एक हालिया अध्ययन ने डायबिटीज की कुछ दवाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुछ मरीजों में डायबिटीज की दवाओं, विशेषतौर पर SGLT2 इन्हिबटर दवाओं के गंभीर साइड-इफेक्ट्स देखे गए हैं। ये ऐसी दवाएं हैं जो टाइप-2 डायबिटीज में शुगर को कम करने के लिए अतिरिक्त शुगर को पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करती हैं। इनका इस्तेमाल केवल डायबिटीज तक सीमित नहीं है। हार्ट फेलियर और किडनी की बीमारी से जुड़े मरीजों को भी इनसे फायदा मिल सकता है।
लेकिन स्वीडन के शोधकर्ताओं ने रिसर्च ने बताया है कि कुछ परिस्थितियों में इन दवाओं से डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का खतरा हो सकता है। जिन लोगों के पहले से डायबिटीज के साथ किडनी की समस्या है या वजन बहुत कम है ऐसे लोगों में इसका खतरा ज्यादा देखा गया है। वैज्ञानिकों की टीम ने डॉक्टरों को भी इस दवा को लिखते समय मरीज की पूरी हिस्ट्री जांच लेने की सलाह दी है।