अप्रैल 2026 में भारत में कुल 220 बड़े कारोबारी समझौते हुए, जिनकी कुल कीमत 22.8 अरब डॉलर रही। यह सब ऐसे समय हुआ, जब दुनिया के कई देशों के बीच तनाव और आर्थिक अनिश्चितताएं हैं।
ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय कंपनियों ने दूसरे देशों की कंपनियों को खरीदने या उनके साथ मिलकर काम करने के के लिए बड़े समझौते किए। इसी वजह से कुल सौदों की कीमत बहुत बढ़ गई। अप्रैल में पांच बड़े सौदे ऐसे थे, जिनकी कीमत एक अरब डॉलर से ज्यादा थी। इन पांच सौदों की कुल कीमत 17.4 अरब डॉलर रही।
कुल मिलाकर 103 ऐसे बड़े व्यापारिक सौदे (विलय और अधिग्रहण) हुए, जिनकी कीमत 18.7 अरब डॉलर रही। यह पिछले कई महीनों में सबसे ज्यादा है। इस महीने विदेशी कंपनियों को खरीदने या विदेश में निवेश करने वाले सौदे बहुत बढ़े। 21 ऐसे बड़े सौदे हुए, जिनकी कीमत 17.7 अरब डॉलर रही।
निजी कंपनियों ने भी निवेश किया, लेकिन उनकी संख्या थोड़ी कम रही। अप्रैल में 109 ऐसे सौदे हुए, जिनकी कीमत 3.2 अरब डॉलर रही। पहले की तुलना में छोटे निवेश कम हुए। लेकिन जो निवेश हुए वे बहुत बड़े और ज्यादा पैसों वाले थे। यानी सौदों की संख्या कम थी, लेकिन हर सौदे में पैसा ज्यादा लगा।
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विदेशी कंपनियों में भारतीयों ने बढ़ाया निवेश
रिपोर्ट के अनुसार, शेयर बाजार में भी गतिविधि रही। अप्रैल में छह कंपनियों ने आईपीओ के जरिये कुल 450 मिलियन डॉलर जुटाए। इसके अलावा, दो कंपनियों ने अन्य तरीके से 548 मिलियन डॉलर जुटाए। एक विशेषज्ञ ने कहा कि इस महीने भारत की कंपनियों ने बड़े स्तर पर विदेशी कंपनियों में निवेश किया। इससे पता चलता है कि भारतीय कंपनियां अब दुनिया में और बड़ा काम करना चाहती हैं।
इन क्षेत्रों में दिखी सक्रियता
अलग-अलग क्षेत्रों में फार्मा (दवा) कंपनियां सबसे आगे रहीं। इसके अलावा, सड़क, इमारत और फैक्टरी बनाने वाले क्षेत्र भी सक्रिय रहे। रिटेल (दुकानें और सामान बेचने वाली कंपनियां), उपभोक्ता सामान और आईटी कंपनियों में भी कई सौदे हुए। पहली बार रियल एस्टेट (जमीन और मकान) क्षेत्र भी सबसे ज्यादा सक्रिय क्षेत्रों में शामिल हो गया।
