राष्ट्रीय जनता दल में संगठन और नेतृत्व को लेकर शुरू हुई बयानबाजी अब खुली तकरार में बदलती नजर आ रही है। मनेर से राजद विधायक भाई वीरेंद्र और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है। दोनों नेताओं के बयानों ने पार्टी के भीतर चल रही असहमति को सार्वजनिक कर दिया है। विवाद की शुरुआत भाई वीरेंद्र के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के आसपास मौजूद कुछ लोगों को हटाने की जरूरत है। उनका कहना था कि ऐसे लोगों के कारण जनता में नाराजगी बढ़ रही है और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और जनता के बीच दोबारा विश्वास कायम करने की आवश्यकता है।

भाई वीरेंद्र के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शक्ति यादव ने सवाल उठाया कि उन्होंने (भाई वीरेंद्र) ने पार्टी के लिए क्या योगदान दिया है? इसके बाद भाई वीरेंद्र ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह लंबे समय से समाजवादी आंदोलन और राजद की राजनीति से जुड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के कठिन दौर में भी वह संगठन के साथ खड़े रहे हैं और उनके राजनीतिक अनुभव पर सवाल उठाना उचित नहीं है। भाई वीरेंद्र ने शक्ति यादव को चेतावनी दी कि यदि उन पर व्यक्तिगत टिप्पणी जारी रही तो वह कई ऐसे तथ्य सार्वजनिक करेंगे, जिनसे कुछ नेताओं के लिए जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने सख्त अंदाज में कहा कि खामोश रहो, मैं लोकदल के जमाने से राजनीति कर रहा हूं जब तुम्हारी राजनीति में एंट्री भी नहीं हुई थी। 2010 में जब 22 विधायक बने थे तब से मैं हूं, कई लोग आए और चले गए लेकिन मैं नहीं बदला। अब 2025 में 25 विधायक हैं और अगर मैं तुम्हारी करतूतें सार्वजनिक कर दूंगा तो तुम मुंह दिखाने लायक नहीं रहोगे।
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तेजस्वी के आसपास रहने वाले लोगों को हटाने की आवश्यकता है
भाई वीरेंद्र ने कहा कि तेजस्वी यादव के आसपास रहने वाले कुछ लोगों को हटाने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, जनता उन लोगों को लेकर नाराज है और उनके प्रति असंसदीय भाषा तक का इस्तेमाल कर रही है। उनका कहना था कि ऐसे लोगों की वजह से पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है, इसलिए नेतृत्व को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब पार्टी को जनता के बीच जाकर फिर से विश्वास कायम करना होगा। लोगों से सीधे संवाद स्थापित करना होगा और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना होगा। उन्होंने स्वीकार किया कि इस पूरे घटनाक्रम में पार्टी से बड़ी गलती हुई है, जिसे सुधारने की जरूरत है।
पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हुआ है
भाई वीरेंद्र ने यह भी दोहराया कि टिकट वितरण और संगठनात्मक फैसलों में सीमित लोगों का प्रभाव पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हुआ है। उनके अनुसार, कुछ नेताओं की सिफारिशों के आधार पर लिए गए निर्णयों का असर चुनावी प्रदर्शन पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि अब संगठन की कार्यशैली और जिम्मेदारियों की नए सिरे से समीक्षा की जानी चाहिए।

