पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद गहरा गया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और बागी गुट के बीच जारी खींचतान के बीच आगामी उपचुनाव के लिए अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह अंतरिम व्यवस्था अंतिम निर्णय होने तक लागू रहेगी। इस घमासान के बीच एक बार फिर दल-बदल कानून चर्चा में है। इसी चर्चा के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिबल ने सुझाव दिया कि जो कोई भी अपने सक्रिय कार्यकाल के दौरान अपनी राजनीतिक पार्टी बदलता है, उसे अगले पांच या दस साल के लिए चुनाव लड़ने और निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में सेवा करने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाना चाहिए। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और अजय सेतिया मौजूद रहे।