लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

क्या है वॉर पावर्स एक्ट? जिसको निक्सन से लेकर ओबामा ने तक नहीं माना.. अब ट्रंप की बारी

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

US Iran War: एक मई से अमेरिका फिर से ईरान पर चढ़ाई करेगा, सवाल इसलिए क्योंकि अब डेडलाइन बिल्कुल पास है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को युद्ध जारी रखने के लिए कांग्रेस से अनुमति लेनी पड़ेगी. अब सवाल वही है, संवैधानिक परंपरा को ट्रंप निभाते हैं, कि अपनी मनमर्जी चलाते हैं. क्योंकि अमेरिका का एक कानून है, जो निकसन से लेकर ओबामा तक के लिए चुनौती पूर्ण रहा है. आइए जानते हैं, क्या है वॉर पावर्स एक्ट? 

अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया. अमेरिकी संसद को इसकी औपचारिक जानकारी 2 मार्च को दी गई. अब यही 2 तारीख 2 मई को पूरे 60 दिन पूरे कर रही है. इस आधार पर 60 दिन की समयसीमा तय होती है. यह समयसीमा अमेरिकी कानून ‘वॉर पावर रेजोल्यूशन’ के तहत आती है. 

साल 1973 में क्यों किया गया था इसे लागू?

  • 1973 में लागू इस कानून का उद्देश्य राष्ट्रपति की युद्ध संबंधी शक्तियों को सीमित करना था. साथ ही कांग्रेस की भूमिका को मजबूत करना था. यदि राष्ट्रपति बिना संसद की मंजूरी के सेना का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें 60 दिनों के भीतर कांग्रेस से इसकी अनुमति लेनी होती है. 
  • इस मामले में 2 मार्च से गिनती करने पर 1 मई वह अंतिम तारीख बनती है. इसके भीतर ट्रंप प्रशासन को संसद की मंजूरी हासिल करनी होगी. अगर ऐसा नहीं होता, तो कानून के मुताबिक सैन्य कार्रवाई समाप्त करनी चाहिए.
  • मंजूरी हासिल करने के लिए अमेरिकी संसद और सीनेट दोनों में साधारण बहुमत आवश्यक होता है. लेकिन, अब तक इस कार्रवाई को लेकर कोई औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप की अपनी पार्टी के कम से कम 10 सांसद इस युद्ध के खिलाफ हैं, जिससे बहुमत जुटाना कठिन हो सकता है.
  • इस कानून को कई राष्ट्रपतियों ने नहीं माना. इनमें निक्सन, रोनाल्ड रीगन, जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बिल क्लिंटन, ओबामा और खुद ट्रंप रहे हैं. उनका तर्क रहा है कि यह कानून राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्तियों में हस्तक्षेप करता है. खासकर जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा और त्वरित सैन्य कार्रवाई की हो.
  • यदि कांग्रेस से मंजूरी नहीं मिलती, तो भी राष्ट्रपति किसी न किसी कानूनी व्याख्या या राष्ट्रीय सुरक्षा के तर्क के आधार पर सैन्य कार्रवाई जारी रखने की कोशिश कर सकते हैं. इससे कार्यपालिका और विधायिका के बीच टकराव की स्थिति भी बन सकती है.

यह भी पढ़ें: 
ईरान-अमेरिका के बीच घिस रहा पाकिस्तान? अफगानिस्तान पर कर रहा उकसावे वाली कार्रवाई, आखिर क्यों?   

]
Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment