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क्या है रेट्रो जीएसटी, क्यों ऑनलाइन गेमिंग कंपनी से सरकार वसूल रही 10 साल का बकाया टैक्स?

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Retro GST: देश में इन दिनों रेट्रो जीएसटी को लेकर काफी चर्चा हो रही है. खासकर ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां इसे लेकर सरकार के खिलाफ खुलकर सवाल उठा रही हैं. मामला हजारों करोड़ रुपये के टैक्स से जुड़ा है और इसका असर पूरे ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर पर पड़ सकता है. सरकार कुछ गेमिंग कंपनियों से पिछले कई सालों का बकाया जीएसटी मांग रही है. कंपनियों का कहना है कि पुराने नियमों के आधार पर अचानक इतना बड़ा टैक्स लगाना सही नहीं है. इसी को लेकर रेट्रो जीएसटी शब्द चर्चा में आया है.

आखिर क्या होता है रेट्रो GST?

रेट्रो GST का मतलब है पुराने समय के कारोबार पर बाद में टैक्स लागू करना या पुराने लेनदेन पर नए तरीके से टैक्स की वसूली करना. यानी अगर किसी कंपनी ने 2018 या 2019 में किसी नियम के हिसाब से काम किया था, लेकिन बाद में सरकार कहे कि उस समय ज्यादा टैक्स देना चाहिए था, तो उसे पुराने सालों का बकाया टैक्स भरना पड़ सकता है.

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ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर क्यों आया मामला?

सरकार का कहना है कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स को सिर्फ अपने कमीशन या फीस पर नहीं, बल्कि पूरे कंटेस्ट अकाउंट पर जीएसटी देना चाहिए था. यानी अगर किसी गेमिंग ऐप पर 100 रुपये का कॉन्टेस्ट हुआ, तो टैक्स सिर्फ कंपनी की कमाई पर नहीं बल्कि पूरे 100 रुपये पर लगेगा. यहीं से विवाद शुरू हुआ. कई कंपनियां अब तक केवल प्लेटफॉर्म फीस पर 18% जीएसटी दे रही थीं. लेकिन सरकार का दावा है कि उन्हें पूरे अकाउंट पर 28% जीएसटी देना चाहिए था. इसी वजह से कई कंपनियों को हजारों करोड़ रुपये के टैक्स नोटिस भेजे गए हैं.

कितने साल पुराना टैक्स मांगा जा रहा है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार कुछ कंपनियों से लगभग 10 साल तक का पुराना टैक्स मांग रही है. यानी पुराने ट्रांजेक्शन की जांच हो रही है, ब्याज और पैनल्टी भी जोड़ी जा रही है, कुल रकम हजारों करोड़ तक पहुंच रही है. इसी को लेकर कंपनियां कह रही हैं कि यह रेट्रो टैक्सेशन जैसा मामला बन गया है.

कंपनियों को क्या दिक्कत है?

ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों का कहना है कि पहले नियम पूरी तरह साफ नहीं थे. इंडस्ट्री लंबे समय से अलग तरीके से जीएसटी दे रही थी. अचानक पुराने सालों का इतना बड़ा टैक्स मांगना गलत है. कंपनियों का यह भी कहना है कि अगर इतना भारी टैक्स देना पड़ा, तो कई स्टार्टअप बंद हो सकते हैं.

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सरकार क्या कह रही है?

सरकार का रुख साफ है कि ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग को बैटिंग और गैंब्लिंग की तरह माना जाएगा, इसलिए इस पर 28% जीएसटी लागू होगा. जीएसटी काउंसिल पहले ही इस पर फैसला ले चुकी है. सरकार का कहना है कि टैक्स चोरी नहीं होने दी जाएगी और सभी कंपनियों को नियमों का पालन करना होगा.

इसका आम लोगों पर क्या असर होगा?

अगर गेमिंग कंपनियों पर भारी टैक्स बोझ बढ़ता है, तो उसका असर सीधे यूजर्स पर भी पड़ सकता है.संभावना है कि एंट्री फीस बढ़ सकती है, विनिंग कम हो सकती हैं और कई ऑफर्स और कैसबैक बंद हो सकते हैं. कुछ छोटी कंपनियां मार्केट से बाहर भी हो सकती हैं. वैसे अब ये मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है. कई ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां इस मामले को लेकर अदालत पहुंच चुकी हैं. उनका कहना है कि सरकार पुराने नियमों की अलग व्याख्या करके भारी टैक्स नहीं वसूल सकती. अब सबकी नजर कोर्ट और जीएसटी काउंसिल के अगले फैसले पर है.

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