पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद से ही सियासी हलचल का दौर जारी है। राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बनने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में टूट को लेकर अटकलों का दौर तेज है। कहा जा रहा है कि पहले जो विवाद टीएमसी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच उभरा था, वह अब विधायकों और शीर्ष नेताओं के बीच पहुंच चुका है। खासकर टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को लेकर पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं में खासी नाराजगी बताई जा रही है। ऐसी भी चर्चा है कि अगर यह विवाद जारी रहा तो टीएमसी का हाल महाराष्ट्र में शिवसेना जैसा हो जाएगा, जिसके अधिकतर सांसद और विधायक पार्टी के सर्वेसर्वा उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के साथ चले गए थे।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर पश्चिम बंगाल पर 15 साल तक शासन करने वाली टीएमसी में हालिया चुनाव नतीजों के बाद ऐसा क्या हुआ है कि पार्टी की टूट की अटकलें लग रही हैं? इसके पीछे के कारण क्या हैं? इसे लेकर ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी का क्या रुख है? टीएमसी में बगावत पर भाजपा का क्या कहना है? आखिर क्यों तृणमूल में इस पूरे विवाद की तुलना महाराष्ट्र में शिवसेना की टूट के घटनाक्रम से की जा रही है? आइये जानते हैं…