बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन के कोलकाता लौटने के उपलक्ष्य में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान शनिवार को कुछ समय के लिए हंगामा हो गया। तस्लीमा द्वारा वरिष्ठ बांग्ला कवि जॉय गोस्वामी को मंच पर आमंत्रित किए जाने के बाद दर्शकों के एक वर्ग ने विरोध शुरू कर दिया, जिससे उनका संबोधन कुछ देर के लिए बाधित हो गया।

मंच की ओर बढ़ते ही शुरू हुआ विरोध
कार्यक्रम में भाषण देने के लिए मंच पर पहुंचीं तस्लीमा नसरीन ने दर्शकों के बीच बैठे साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कवि जॉय गोस्वामी से मंच पर आने का आग्रह किया। जॉय गोस्वामी जैसे ही अपनी सीट से उठकर मंच की ओर बढ़े, दर्शकों के एक वर्ग ने जोरदार विरोध और नारेबाजी शुरू कर दी। विरोध बढ़ता देख गोस्वामी वापस अपनी सीट पर लौट गए।
STORY | Audience protests as Taslima invites poet Joy Goswami on stage; brief disruption halts speech
A brief commotion broke out at an auditorium here on Saturday after exiled Bangladeshi author Taslima Nasreen invited noted Bengali poet Joy Goswami to join her on stage,… pic.twitter.com/h4uAxTd6MG
— Press Trust of India (@PTI_News) August 1, 2026
अचानक हुए इस घटनाक्रम के दौरान तस्लीमा कुछ क्षण तक मंच पर माइक के सामने चुपचाप खड़ी रहीं। सभागार में कई मिनट तक शोरगुल और नारेबाजी होती रही। आयोजकों ने बार-बार लोगों से शांत रहने की अपील की, लेकिन कुछ देर तक हंगामा जारी रहा।
तस्लीमा की अपील के बाद शांत हुए लोग
कुछ देर बाद तस्लीमा नसरीन ने खुद दर्शकों से कहा, “क्या मैं बोलूं? अगर ऐसा है तो कृपया शांत हो जाइए और अपनी-अपनी सीटों पर बैठ जाइए।” उनकी अपील के बाद स्थिति सामान्य हुई और उन्होंने अपना संबोधन जारी रखा।
विरोध के पीछे पुरानी नाराजगी की चर्चा
रिपोर्ट के अनुसार, दर्शकों के एक वर्ग की नाराजगी की वजह जॉय गोस्वामी की वह कथित चुप्पी मानी जा रही है, जब तस्लीमा नसरीन लंबे समय तक निर्वासन में रहीं। साथ ही, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ उनकी निकटता को लेकर भी कुछ लोगों में असंतोष बताया गया।
हालांकि, जॉय गोस्वामी पहले सार्वजनिक रूप से तस्लीमा के लंबे निर्वासन पर अफसोस जता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि 2007 में जब तस्लीमा को विरोध प्रदर्शनों के कारण कोलकाता छोड़ना पड़ा था, तब उनके लिए पर्याप्त नहीं कर पाने के कारण वह खुद को “दोषी” मानते हैं।
कौन हैं जॉय गोस्वामी?
जॉय गोस्वामी समकालीन बांग्ला साहित्य के सबसे प्रतिष्ठित कवियों और लेखकों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 10 नवंबर 1954 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ। बचपन में ही पिता के निधन के बाद उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने लेखन नहीं छोड़ा। उनकी कविताओं में आम लोगों का जीवन, मानवीय संवेदनाएं, प्रेम, अकेलापन, सामाजिक बदलाव और कल्पनाशीलता प्रमुख विषय रहे हैं। उनकी भाषा सरल होने के बावजूद गहरी भावनात्मक अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती है।
कविता के अलावा उन्होंने उपन्यास, कहानियां और बाल साहित्य भी लिखा है। बांग्ला साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है, जिनमें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी शामिल है। जॉय गोस्वामी की रचनाएं नई पीढ़ी के पाठकों के बीच भी लोकप्रिय हैं और उन्हें आधुनिक बांग्ला कविता की सबसे प्रभावशाली आवाजों में से एक माना जाता है।
19 साल बाद कोलकाता लौटी हैं तस्लीमा
यह कार्यक्रम पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा राज्य सचिवालय परिसर के एक सभागार में तस्लीमा नसरीन को नागरिक अभिनंदन दिए जाने के कुछ घंटे बाद आयोजित किया गया था। करीब 19 साल बाद कोलकाता पहुंचीं तस्लीमा ने अपने संबोधन में कहा कि यह वापसी उनके जीवन के एक हिस्से में लौटने जैसी है, जिसे वह पीछे छोड़ आई थीं।
उन्होंने कहा कि उनकी घर वापसी इस बात का प्रमाण है कि “अन्याय लंबे समय तक रह सकता है, लेकिन हमेशा के लिए नहीं।” उन्होंने उम्मीद जताई कि एक दिन ऐसा आएगा, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल करने के कारण किसी लेखक को निर्वासन नहीं झेलना पड़ेगा।
तस्लीमा नसरीन ने नवंबर 2007 में अपने लेखन को लेकर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद कोलकाता छोड़ दिया था। इसके बाद उन्हें पहले जयपुर और फिर केंद्र सरकार की सुरक्षा में नई दिल्ली ले जाया गया। बाद में वह भारत से बाहर चली गईं। शनिवार का दौरा 19 वर्षों में उनकी कोलकाता की पहली यात्रा रहा।
