
ऑस्ट्रेलिया में इमिग्रेशन और इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को लेकर बहस तेज हो गई है. ऑस्ट्रेलिया के इमिग्रेशन मंत्री टोनी बर्क ने कहा है कि सरकार ऐसे प्रवास का समर्थन करती है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को फायदा हो. हालांकि, सरकार वीजा सिस्टम पर ज्यादा कंट्रोल चाहती है ताकि इसका इस्तेमाल केवल ऑस्ट्रेलिया में लंबे समय तक रहने के रास्ते के तौर पर न हो.
मंत्री ने यह बात नेशनल प्रेस क्लब में अपने भाषण के दौरान कही. उन्होंने खास तौर पर इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के वीजा बदलने, कंस्ट्रक्शन वर्कर्स की जरूरत और योग शिक्षकों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर सरकार का पक्ष रखा.
कंस्ट्रक्शन वर्कर्स और योग शिक्षकों पर क्या बोले मंत्री?
ऑस्ट्रेलिया में यह दावा किया जा रहा था कि सरकार कंस्ट्रक्शन वर्कर्स की तुलना में ज्यादा योग शिक्षकों को देश में आने की अनुमति दे रही है. टोनी बर्क ने इस दावे को गलत बताया. उन्होंने कहा कि पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में आने वाले कंस्ट्रक्शन वर्कर्स की संख्या 15,000 से थोड़ी कम थी. इससे पहले यह संख्या करीब 4,500 थी. यानी सरकार के मौजूदा कार्यकाल में कंस्ट्रक्शन वर्कर्स की संख्या काफी बढ़ी है. बर्क ने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में योग शिक्षकों को बुलाने की संख्या शून्य रही है. उन्होंने यह भी बताया कि योग शिक्षक पेशे से जुड़ा प्रावधान पिछली सरकार के समय भारत के साथ हुए व्यापार समझौते के तहत आया था.
भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौते में योग शिक्षकों का प्रावधान
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच Economic Cooperation and Trade Agreement (ECTA) अप्रैल 2022 में साइन हुआ था और दिसंबर 2022 से लागू हुआ. इस समझौते के तहत हर साल 1,800 तक योग्य भारतीय प्रोफेशनल्स को कुछ विशेष श्रेणियों में अस्थायी रूप से ऑस्ट्रेलिया आने की अनुमति दी जा सकती है. इसमें भारतीय शेफ और योग इंस्ट्रक्टर भी शामिल हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि हर साल 1,800 योग शिक्षक ऑस्ट्रेलिया पहुंचते हैं. यह अधिकतम अनुमति वाली श्रेणी है और वास्तविक संख्या अलग हो सकती है. टोनी बर्क ने इसी अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि योग शिक्षकों का प्रावधान मौजूदा सरकार की ओर से शुरू नहीं किया गया था.
वीजा बदलना हमेशा ‘वीजा हॉपिंग’ नहीं
इमिग्रेशन मंत्री ने इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के एक वीजा से दूसरे वीजा में जाने के मुद्दे पर भी बात की. उन्होंने कहा कि हर वीजा बदलाव को ‘वीजा हॉपिंग’ कहना सही नहीं है. सरकार के मुताबिक, अगर कोई छात्र ऑस्ट्रेलिया में किसी ऐसे क्षेत्र में पढ़ाई पूरी करता है जहां कुशल कर्मचारियों की कमी है, फिर ग्रेजुएट वीजा लेकर संबंधित नौकरी करता है और उसके बाद नियोक्ता की मदद से दूसरे वीजा या स्थायी निवास की प्रक्रिया में जाता है तो इसे वैध रास्ता माना जा सकता है. समस्या उन मामलों से है जहां कोई व्यक्ति पढ़ाई के बजाय ऑस्ट्रेलिया में ज्यादा समय तक रहने के उद्देश्य से बार-बार कोर्स या वीजा बदलता है. सरकार ऐसे मामलों पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रही है.
छात्रों के कोर्स बदलने पर भी नजर
टोनी बर्क ने कहा कि छात्रों को जरूरत के अनुसार अपना कोर्स बढ़ाने या सही कारण से संस्थान बदलने की अनुमति रहेगी. लेकिन सरकार चाहती है कि छात्र अपनी पढ़ाई में आगे बढ़ें. उदाहरण के तौर पर बैचलर डिग्री के बाद मास्टर डिग्री करना एक सामान्य प्रगति मानी जा सकती है. इसके विपरीत अलग-अलग स्तर के कोर्स के बीच बार-बार बदलाव करने पर सवाल उठ सकते हैं. सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि स्टूडेंट वीजा का इस्तेमाल मुख्य रूप से पढ़ाई के लिए हो, न कि केवल इमिग्रेशन का रास्ता बनाने के लिए.
ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों की बड़ी संख्या
ऑस्ट्रेलिया के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2026 के शुरुआती पांच महीनों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भारतीय छात्रों की हिस्सेदारी करीब 16 प्रतिशत रही. इस आधार पर भारत ऑस्ट्रेलिया के लिए चीन के बाद दूसरा बड़ा छात्र स्रोत बना. इस अवधि में भारतीय छात्रों की संख्या करीब एक लाख से थोड़ी ज्यादा रही, जबकि चीन से आने वाले छात्रों की संख्या लगभग 1.6 लाख बताई गई. इसलिए ऑस्ट्रेलिया की इमिग्रेशन पॉलिसी में होने वाले बदलाव भारतीय छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं.
परिवार को साथ लाने के नियमों में बदलाव
प्रस्तावित इमिग्रेशन बदलावों में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स और ग्रेजुएट वीजा धारकों के परिवार को ऑस्ट्रेलिया लाने के नियम भी शामिल हैं. सरकार आम तौर पर छात्रों और ग्रेजुएट वीजा धारकों को अपने परिवार के सदस्यों को साथ लाने की ऑटोमैटिक अनुमति नहीं देने की दिशा में बदलाव कर रही है. हालांकि, पहले से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे परिवारों को अलग करने का मकसद नहीं बताया गया है. कुछ श्रेणियों के छात्रों को छूट भी मिल सकती है. इनमें कुछ प्रशांत और ASEAN देशों के छात्र तथा PhD जैसे विशेष कार्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्र शामिल हैं.
