कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का समर्थन करने का फैसला किया है। इस फैसले ने लद्दाख के राजनीतिक इतिहास के एक कम चर्चित अध्याय को फिर से चर्चा में ला दिया है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सोनिया गांधी ने पार्टी नेताओं को याद दिलाया कि उनकी सास और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी वर्ष 1984 में लेह गई थीं। उनका मकसद सोनम वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग को लेकर चल रही उनकीभूख हड़ताल को समाप्त करने के लिए मनाना था।
यह बात संसद के मानसून सत्र से पहले कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में सामने आई, जब कुछ नेता वांगचुक के आंदोलन का समर्थन करने को लेकर असमंजस की स्थिति में थे।
सूत्रों ने बताया कि सोनिया गांधी ने आंदोलन का समर्थन करने की बात कही। इसके कुछ समय बाद उनके निर्देश पर कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने सोनम वांगचुक से मुलाकात की, उनसे अनशन खत्म करने का आग्रह किया और कांग्रेस की ओर से पूरा समर्थन देने का भरोसा दिलाया।

