भारत में अप्रैल से मई के अंतिम हफ्तों तक गर्मी का स्तर जबरदस्त स्तर पर पहुंच चुका है। खासकर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में, जहां पारा 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने लगा है। राजस्थान से लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार तक के जिलों में पारा लगातार ऊंचा बना हुआ है। भले ही इस बीच पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में कहीं-कहीं मौसम में बदलाव और मानसून के आने से पहले आने वाली हवाओं-बारिश के चलते तापमान थोड़ा कम हुआ, लेकिन एक मौसम प्रणाली ने भारत के साथ पूरी दुनिया का डर कायम रखा है। इसका नाम है सुपर अल-नीनो।
यह नाम चौंकाने वाला इसलिए है, क्योंकि दुनिया में आमतौर पर दो मौसम प्रणालियों की चर्चा हमेशा से रही है। पहली- अल-नीनो और दूसरी ला-नीना की। महासागरों में तापमान पर नजर रखने वाले वैज्ञानिक इन्हीं दोनों प्रणालियों के आधार पर यह अनुमान लगाते हैं कि आखिर इस बार कौन से देश भीषण गर्मी का सामना करेंगे और कौन से क्षेत्रों में वर्षा और ठंड की स्थिति बेहतर होगी। हालांकि, 2026-27 के लिए जिस मौसमी प्रणाली की चर्चा सबसे ज्यादा है, वह एक संभावित सुपर अल-नीनो की है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि जिस तरह प्रशांत महासागर के अलग-अलग दायरों में गर्मी दर्ज की जा रही है, वह चौंकाने वाली है। यही गर्मी अब हवा के साथ घुलकर कुछ देशों में तापमान को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचाने वाली है। यह स्थिति एक मजबूत अल-नीनो की स्थिति पैदा कर रही है।