निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दोनों गुटों से पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को लेकर किए गए दावों और जवाबी दावों पर जवाब मांगा है। अधिकारियों के मुताबिक, आयोग ने दोनों पक्षों से 6 जुलाई की शाम साढ़े पांच बजे तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
हम ही असली टीएमसी, हमारे पास दो तिहाई बहुमत: ऋतब्रत बनर्जी
इससे पहले, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रितब्रत बनर्जी ने बताया था कि टीएमसी के 10 विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से मुलाकात की। इसके बाद बनर्जी ने मीडिया से कहा कि हम लोग ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं और हमारे पास दो तिहाई बहुमत है।
मीडिया से बातचीत के दौरान बनर्जी ने कहा कि 22 जून को कोलकाता में हमारा एक अधिवेशन आयोजित हुआ, जिसके आधार पर टीएमसी को चुना गया और अरूप राय को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (बागी गुट) का अध्यक्ष चुना गया। जैसे ही हमारी ये विशेष बैठक हुई, हमने निर्वाचन आयोग से 23 जून को मिलने के लिए समय मांगा।
उन्होंने कहा, हमने निर्वाचन आयोग से निवेदन किया था कि वे जितने भी सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल को अनुमति देंगे, हम यहां आकर पूर्ण पीठ से मुलाकात करेंगे। हम निर्वाचन आयोग को धन्यवाद देना चाहते हैं कि उसकी पूर्ण पीठ ने हमसे मुलाकात की। हम उम्मीद करते हैं कि आयोग जल्द ही हमसे संपर्क करेगा।
उन्होंने कहा, हम ही अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस हैं। दो तिहाई से भी ज्यादा विधायक, जिला परिषद के सदस्य, पार्षद आदि सभी हमारे साथ हैं। ऐसे में (टीएमसी के चुनाव चिह्न को लेकर) मांग की कोई बात ही नहीं है। जब भी पार्टी में इस तरह का सत्र होता है, तो निर्वाचन आयोग को इसके बारे में तुरंत सूचित किया जाना चाहिए। हम शुक्रगुजार हैं कि पूर्ण पीठ ने हमसे मुलाकात की।
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उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर की एक पार्टी पर एक नौकरशाह ने कब्जा कर लिया। यह कभी जमीनी स्तर की पार्टी हुआ करती थी। लेकिन धीरे-धीरे यह एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द सिमट गई। अगर कोई सिंडिकेट में शामिल रहा है। चाहे वह रेत, कोयला, डोलोमाइट, मवेशी या किसी भी तरह के भ्रष्टाचार से जुड़ा हो तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ मिला जनमत असल में भ्रष्टाचार के खिलाफ भी एक फैसला है। उन्होंने कहा, ऐसा नहीं है कि मैं व्यक्तिगत तौर पर कह रहा हूं। हम सामूहिक रूप से बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल की आवाम परिवारवाद को समर्थन नहीं करता है।
ममता गुट ने निर्वाचन आयोग पर उठाए सवाल
वहीं, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने निर्वाचन आयोग के फैसले पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि आयोग ने बागी गुट को मिलने का समय देकर अपने ही नियमों का उल्लंघन किया।
ममता के नेतृत्व वाले गुट का क्या कहना है?
लेकिन ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने इस दावे को खारिज किया है। उनका कहना है कि बागी नेता निर्वाचन आयोग के सामने पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत (अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता) नहीं हैं। ममता बनर्जी के गुट ने निर्वाचन आयोग के इस फैसले पर भी सवाल उठाए कि उसने बागी गुट को मिलने का समय क्यों दिया। उनका आरोप है कि इससे आयोग ने अपने ही नियमों का उल्लंघन किया है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता सौगत राय और सागरिका घोष ने कहा कि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल की ओर से केवल अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ही निर्वाचन आयोग से मिलने का समय मांग सकते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने ऐसी कोई मांग नहीं की थी।


