कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार कावेरी जल विवाद पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में शामिल होने के लिए अपने आधिकारिक आवास पहुंचे।

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और बसवराज बोम्मई, केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम. वीरप्पा मोइली और कर्नाटक सरकार के मंत्री एमबी पाटिल, कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद भी इस बैठक में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री के आवास पर पहुंचे हैं।
इसके अलावा, उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर, केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना और शोभा करंदलाजे, राज्य के मंत्री रामलिंगा रेड्डी, केजे जॉर्ज और कृष्णा बायरे गौड़ा, दिल्ली में राज्य सरकार के विशेष प्रतिनिधि टीबी जयचंद्र, विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक, विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवादी नारायणस्वामी, महाधिवक्ता शशिकिरण शेट्टी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद हैं।
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क्या है कावेरी जल विवाद?
कावेरी नदी कर्नाटक से निकलकर तमिलनाडु होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है। दोनों राज्यों के बीच दशकों से इस बात को लेकर विवाद रहा है कि नदी का पानी किस अनुपात में बांटा जाए। इस विवाद के समाधान के लिए कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था और बाद में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण बनाया गया, जो जरूरत के अनुसार पानी छोड़ने के निर्देश देता है। हालांकि, कम बारिश या जलाशयों में पानी कम होने की स्थिति में यह मुद्दा अक्सर फिर से विवाद का कारण बन जाता है।
अब तमिलनाडु के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले से यह मामला एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। अदालत के अगले कदम और दोनों राज्यों के रुख पर पूरे विवाद की दिशा निर्भर करेगी।
सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी तमिलनाडु सरकार?
इससे पहले शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार ने साफ किया कि वह अपने हिस्से के पानी के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। राज्य के कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने कहा कि कर्नाटक की ओर से पानी छोड़ने से इनकार किए जाने के बाद अब कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा।

