लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

एन चंद्रशेखरन दोबारा नहीं बन पाएंगे Tata Sons के चेयरमैन? टाटा ट्रस्ट की मंजूरी बनेगी वजह

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

टाटा ग्रुप के बीच पिछले कई दिनों से काफी बवाल मचा हुआ है. खासतौर से जबसे एन चंद्रशेखरन को दोबारा से चेयरमैन बनाने का फैसला किया गया है, तब से मामला बढ़ता ही जा रहा है. नोएल टाटा नहीं चाहते हैं कि चंद्रशेखरन को दोबारा से चेयरमैन बनाया जाए. लेकिन टाटा ग्रुप के कई और सदस्य उन्हें दोबारा से कार्यभार सौंपना चाहते हैं.

इसी बीच अब खबरें ऐसी भी सामने आ रही हैं कि टाटा ट्रस्ट का यदि मंजूरी नहीं होगी, तो एन चंद्रशेखरन दोबारा से टाटा संस के चेयरमैन नहीं बन पाएंगे. ऐसा सीनियर एडवोकेट एचपी रनिना ने खुद बताया है.

क्या बोले एचपी रनिन?
हाल ही में सीनियर एडवोकेट एचपी रनिना ने इस मामले को लेकर न्यूज एजेंसी ANI के साथ बातचीत की है. इस दौरान उन्होंने कहा है कि, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के लिए टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों की सहमति जरूरी है. उन्होंने 29 सितंबर को दिए एक बयान में कहा कि, ‘सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी इस मामले में फैसला करेंगे. इसके बाद वो टाटा संस के बोर्ड में अपने प्रतिनिधि निदेशकों को बताएंगे कि दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव पर किस तरह वोट करना है.

नोएल टाटा नहीं करेंगे फैसला
रनिना ने इस दौरान ये भी बताया कि, ये फैसला सिर्फ नोएल टाटा का नहीं है. टाटा ट्रस्ट की ओर से बोर्ड में नामित निदेशकों में नोएल टाटा और वेणुगोपाल श्रीनिवासन शामिल हैं. इन्हें ट्रस्ट के निर्देश के अनुसार वोट करना होगा.

दोनों ट्रस्ट के प्रतिनिधियों की सहमति जरूरी
टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में इस तरह की नियुक्ति के लिए टाटा ट्रस्ट ने नामित निदेशकों की तरफ से अफर्मेटिव वोट को जरूरी बताया गया है. रनिना के मुताबिक, अगर इन नामित निदेशकों में से किसी एक की भी सहमति नहीं होती है, तो चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति आगे नहीं बढ़ सकती.

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट करीब तीन साल पहले इस व्यवस्था को वैध बता चुका है. कोर्ट के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट के नामित निदेशकों की सकारात्मक सहमति को अनिवार्य करना गैरकानूनी नहीं है.

शेयर होल्डर्स की मंजूरी भी जरूरी
बता दें कि चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के लिए कंपनी के शेयर होल्डर्स की मंजूरी भी जरूरी होगी. ये प्रस्ताव एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में शेयर होल्डर्स के सामने रखा जाएगा. अगर शेयर होल्डर्स प्रस्ताव के खिलाफ वोट करते हैं, तो चंद्रशेखरन को दोबारा चेयरमैन नियुक्त नहीं किया जा सकता.

ये भी पढ़ें: बैंक कर्मचारियों के लिए वीक में 5 दिन काम की तैयारी, बनी स्पेशल कमेटी

Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment