यमन के विद्रोही- हूती संगठन की तरफ से सऊदी अरब पर लगातार हमले बोले जा रहे हैं। आलम यह है कि बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स के भीषण हमलों से सऊदी अरब के कई अहम ऊर्जा ढांचों, हवाई अड्डों और यानबू शहर के बंदरगाह के करीब लाल सागर (रेड सी) में वाणिज्यिक तेल टैंकरों को भारी नुकसान पहुंचा है। सऊदी अरब की तरफ से भी इन हमलों का जवाब देने की भरपूर कोशिश की जा रही है। हालांकि, हूतियों की ताकत के आगे फिलहाल सऊदी की रणनीति काम करती नहीं दिख रही।
इस बीच पूरी दुनिया में एक ही सवाल गूंज रहा है। वह यह कि एक महीने पहले सऊदी अरब के नेतृत्व में तीन इस्लामिक देशों के बीच एक-दूसरे के बचाव के लिए जो मक्का समझौता हुआ था, उसका क्या हुआ? क्यों इस समझौते के तहत सऊदी के साथ गठबंधन बनाने वाले पाकिस्तान और तुर्किये अब उसकी मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं? एक परमाणु शक्ति होने के बावजूद पाकिस्तान क्यों सिर्फ धमकियों तक ही सीमित रह गया? उसके किस नेता ने क्या कहा है? आइये जानते हैं…


