
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट लगभग पूरा होने वाला है, बस आखिरी 1 या 2 प्रतिशत कानूनी टेक्स्ट पर बातचीत चल रही है. राजनयिक मतभेदों की अफवाहों को खारिज करते हुए गोर ने सोमवार को घोषणा की कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता पूरा होने की कगार पर है.
US-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 में प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए गोर ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर बहुत उम्मीदें जताईं. लगभग 18 महीनों से तैयार हो रहे ट्रेड एग्रीमेंट में हाल ही में अदालत के दखल के चलते प्रशासनिक देरी हुई थी. गोर ने संबंधित पक्षों को भरोसा दिलाया कि US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव एंबेसडर जेमिसन ली ग्रीर की हालिया 2 दिवसीय दिल्ली यात्रा से इस मसले को सुलझाने में कामयाबी मिली है.
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, अमेरिकी राजदूत ने बताया कि भारत में अमेरिकी मिशन ने अपने यूरोपीय समकक्षों को पीछे छोड़ते हुए अकेले इसी साल अमेरिका में 20.5 अरब डॉलर का भारी-भरकम नया निवेश लाने में मदद की है. उन्होंने आगे कहा कि हम डेढ़ साल से इस ट्रेड डील पर काम कर रहे हैं. यूरोपीय ट्रेड डील में 20 साल लगे थे. चाहे कुछ भी हो, जब तक हम यूरोपीय डील से बेहतर कर रहे हैं, मुझे लगता है कि हम अच्छी स्थिति में हैं.
यूरोप का उदाहरण देकर क्या कहा
गोर ने कहा कि यूरोप में हमारे बहुत सुंदर दूतावास हैं और वे मंच पर आकर कहते हैं हमें 500 मिलियन डॉलर की घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है. कोई कहता है कि हमें 700 मिलियन डॉलर की घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है, जबकि नई दिल्ली में हमारे दूतावास ने इस साल 20.5 अरब डॉलर का नया निवेश लाने की घोषणा की है.
ट्रंप की भारत यात्रा का किया जिक्र
वॉशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई दो घंटे की प्राइवेट मीटिंग को लेकर गोर ने कहा कि राष्ट्रपति इस स्ट्रैटेजिक अलायंस को लेकर पूरी तरह कमिटेड हैं. भारत से जुड़ी उनकी यादें बहुत अच्छी हैं. उनकी पिछली यात्रा सबसे यादगार थी, जिसके बारे में वे आज भी बात करते हैं. उन्होंने आगे कहा कि वे (ट्रंप) भारत को बहुत पसंद करते हैं और इसलिए मैं उम्मीद करता हूं कि किसी समय वो फिर से भारत आएंगे.
गोर ने बताया कि दुनिया का भविष्य डीप टेक्नोलॉजी, डिफेंस इंटीग्रेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों पर काफी हद तक निर्भर है. उन्होंने कहा कि मेरा मकसद इन संभावनाओं का फायदा उठाना और दोनों पक्षों को एक साथ लाना है. आखिर में यह दोनों के लिए फायदेमंद स्थिति (विन-विन सिचुएशन) की बात है.
‘अमेरिका को सबसे ज्यादा माल बेचता है भारत’
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के किसी भी दूसरे देश की तुलना में अमेरिका को सबसे ज्यादा सामान और सर्विस एक्सपोर्ट करता है. रक्षा सहयोग के मामले में अमेरिका किसी भी दूसरे ग्लोबल पार्टनर की तुलना में भारत के साथ ज़्यादा जॉइंट मिलिट्री और रक्षा अभ्यास करता है. गोर ने जोर देकर कहा कि दोनों सरकारों का फोकस अब उस 500 अरब डॉलर के बड़े द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को पूरा करने पर है, जिसकी शुरुआत राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी.
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