देश के दो चर्चित ओलंपियन शनिवार को उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पहुंचे। ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा और ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज गगन नारंग ने ताला गेट से करीब चार घंटे तक जंगल सफारी की। इस दौरान दोनों खिलाड़ियों ने बांधवगढ़ के प्राकृतिक वातावरण और वन्यजीवों को करीब से देखा और जंगल की खूबसूरती का आनंद लिया।
शनिवार सुबह नीरज चोपड़ा और गगन नारंग ताला गेट पहुंचे। यहां टाइगर रिजर्व प्रबंधन की ओर से उनके लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। ताला गेट से प्रवेश के बाद दोनों खिलाड़ियों ने जंगल के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण किया। सफारी के दौरान रेंज ऑफिसर और सहायक संचालक सहित वन विभाग के अधिकारी भी उनके साथ मौजूद रहे। अधिकारियों ने उन्हें बांधवगढ़ के जंगल, वन्यजीवों और क्षेत्र की प्राकृतिक विशेषताओं के बारे में जानकारी दी।
करीब चार घंटे तक चली सफारी के दौरान दोनों ओलंपियन ने जंगल के शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से महसूस किया। बांधवगढ़ का घना जंगल, पहाड़ी भू-भाग और वन्यजीवों का प्राकृतिक परिवेश उनके लिए खास आकर्षण रहा। वन विभाग की टीम ने सफारी के दौरान सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं का भी विशेष ध्यान रखा।
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सफारी पूरी होने के बाद नीरज चोपड़ा ने बांधवगढ़ के जंगल की खूबसूरती की सराहना की। उन्होंने यहां के जंगल को ‘बहुत सुंदर’ बताते हुए प्राकृतिक वातावरण की प्रशंसा की। साथ ही युवाओं को सफलता का मंत्र देते हुए कहा कि जीवन में कामयाबी हासिल करने के लिए मेहनत के साथ मजबूत सपोर्ट सिस्टम का होना भी जरूरी है। परिवार, मित्रों और सहयोगियों का साथ व्यक्ति को अपने लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करता है।
वहीं, गगन नारंग ने भी बांधवगढ़ के जंगल को सुंदर और शांत बताया। उन्होंने इसे ‘प्राकृतिक धरोहर’ बताते हुए इसके संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि जंगल और वन्यजीवों को सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस प्राकृतिक संपदा को उसी रूप में देख और महसूस कर सकें।
दोनों ओलंपियन के बांधवगढ़ पहुंचने की खबर से स्थानीय स्तर पर भी उत्साह देखा गया। अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर देश का नाम रोशन कर चुके नीरज चोपड़ा और गगन नारंग का टाइगर रिजर्व पहुंचना क्षेत्र के लिए खास आकर्षण रहा।
बांधवगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों के बीच बिताए करीब चार घंटे दोनों खिलाड़ियों के लिए यादगार रहे। उनकी प्रतिक्रियाओं में जंगल की खूबसूरती की सराहना के साथ प्रकृति संरक्षण और युवाओं के लिए सकारात्मक संदेश भी सामने आए।


