उबर टेक्नोलॉजीज अपने वैश्विक कार्यबल में करीब 10 प्रतिशत की कटौती करने जा रही है। कंपनी ने यह फैसला अपने कामकाज में बदलाव और संचालन को अधिक सरल बनाने के उद्देश्य से लिया है। कंपनी के हालिया आंकड़ों के आधार पर इस कटौती से करीब 3,400 नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।
उबर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दारा खोसरोशाही ने कर्मचारियों को भेजे एक ज्ञापन में कहा कि कंपनी प्रबंधन के स्तरों को कम कर रही है, टीमों की संरचना को सरल बना रही है और अपनी वैश्विक उपस्थिति की रणनीति में बदलाव कर रही है।
छंटनी को लेकर कंपनी ने दिया क्या जवाब?
दारा खोसरोशाही ने लिखा, “इसके नतीजे के तौर पर हम अपनी टीम के आकार में करीब 10 प्रतिशत की कमी करेंगे। जिन लोगों की भूमिकाएं प्रभावित हुई हैं, उन्हें पहले ही इसकी जानकारी दी जा चुकी है। हालांकि, उन देशों में स्थानीय प्रक्रिया के तहत यह कदम उठाया जाएगा, जहां ऐसा करना जरूरी है।”
31 दिसंबर, 2025 को समाप्त वित्त वर्ष की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, उबर और उसकी सहयोगी कंपनियों में दुनियाभर में करीब 34,000 कर्मचारी थे। कंपनी 70 से अधिक देशों और 15,000 से अधिक शहरों में काम करती है। इस आधार पर 10 प्रतिशत कर्मचारियों की कटौती का मतलब करीब 3,400 कर्मचारियों पर असर पड़ना है।
भारत पर क्या होगा छंटनी का असर?
उबर इंडिया के प्रवक्ता ने पीटीआई से कहा, “वैश्विक स्तर पर हम संगठनात्मक बदलाव कर रहे हैं ताकि प्रबंधन के स्तर कम किए जा सकें और हम तेजी से काम कर सकें। इन बदलावों के तहत भारत में उबर के कुछ महत्वपूर्ण टीम सदस्यों को भी विदाई देनी होगी। हम इस बदलाव के दौरान उनका सहयोग करेंगे। भारत एक प्रमुख बाजार बना रहेगा और यात्रियों तथा चालकों के लिए स्थानीय स्तर पर नवाचार करने की हमारी प्रतिबद्धता में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वास्तव में, हम यहां अपने क्षेत्रीय संचालन को मजबूत कर भारत की रणनीतिक भूमिका का विस्तार कर रहे हैं, ताकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपने परिवहन कारोबार को आगे बढ़ाया जा सके।”
उबर ने क्यों लिया छंटनी का फैसला?
नौकरियों में कटौती की वजह बताते हुए खोसरोशाही ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में उबर का राजस्व करीब तीन गुना हुआ है। इस दौरान कंपनी ने नए कारोबार और बाजारों में विस्तार किया। हालांकि, इस वृद्धि के साथ कंपनी के संगठन में जटिलता भी बढ़ी। उन्होंने कहा कि प्रबंधन के अधिक स्तर, ज्यादा समन्वय, जिम्मेदारियों का बंटा होना और ऐसी संगठनात्मक व्यवस्थाएं सामने आईं, जो कंपनी के मौजूदा आकार के हिसाब से अब प्रभावी नहीं रह गई थीं।
खोसरोशाही ने कहा, “हमारे पास उबर को करोड़ों और लोगों तक पहुंचाने, चालकों, डिलीवरी कर्मियों और कारोबारियों में और अधिक निवेश करने तथा अपने मुख्य कारोबार में नवाचार करने और स्वचालित भविष्य के निर्माण का अवसर है। इन कामों के लिए हमें यह तय करना होगा कि अपने कर्मचारियों, समय और पूंजी का इस्तेमाल कहां किया जाए।”
किन पदों पर गिरी छंटनी की गाज?
उबर ने मुख्य रूप से समन्वय से जुड़े पदों में कटौती की है और प्रबंधन के स्तरों को कम किया है। इसके तहत प्रबंधकों की जिम्मेदारियां बढ़ाई गई हैं, खासकर उन छोटी टीमों के मामलों में जहां उनके अधीन केवल एक या दो कर्मचारी थे। कंपनी ने कहा कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी से सात या उससे अधिक स्तर नीचे काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या में 20 प्रतिशत की कमी की गई है। वहीं, ऐसी छोटी टीमों की संख्या करीब 50 प्रतिशत घटाई गई है।
इसके अलावा, उबर अपने डिलीवरी कारोबार की तीन अलग-अलग टीमों को मिला रही है। इनमें रेस्तरां, खुदरा और प्रत्यक्ष डिलीवरी से जुड़ी टीमें शामिल हैं। इन्हें वैश्विक, क्षेत्रीय और देश स्तर पर एकल जिम्मेदारी वाली टीमों में बदला जाएगा। कंपनी के प्रौद्योगिकी विभाग में भी मुख्य सेवाओं से जुड़ी इंजीनियरिंग और विज्ञान टीमों को एक किया जा रहा है।
वर्क फ्रॉम होम को लेकर क्या बोली कंपनी?
उबर कर्मचारियों के पदों को कम संख्या वाले प्रमुख शहरों में भी केंद्रित कर रही है। वैश्विक टीमों को न्यूयॉर्क और सैन फ्रांसिस्को में रखा जाएगा, जबकि क्षेत्रीय, देश और प्रौद्योगिकी टीमों को तय क्षेत्रीय और प्रौद्योगिकी केंद्रों में केंद्रित किया जाएगा। कंपनी ने कहा कि वह अपने ज्यादातर दूर से काम करने वाले कर्मचारियों को कार्यालय से काम करने के लिए कह रही है। आगे चलकर करीब एक प्रतिशत कर्मचारी ही पूरी तरह दूर से काम करेंगे।
उबर ने कहा कि उसकी मौजूदा हाइब्रिड कार्य नीति जारी रहेगी। इसके तहत कर्मचारियों को सप्ताह में तीन दिन कार्यालय से काम करना होता है। खोसरोशाही ने माना कि ये बदलाव मुश्किल होंगे। उन्होंने लिखा, “यह ऐसा फैसला नहीं था जिसे हमने आसानी से लिया। इसका उन साथियों और दोस्तों पर वास्तविक असर पड़ेगा, जिन्होंने उबर के लिए कड़ी मेहनत की है।”
इस साल की शुरुआत में भारत दौरे के दौरान खोसरोशाही ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की थी। उन्होंने बताया था कि 2022 के बाद से भारत में उबर के मंच से कमाई करने वाले लोगों की संख्या चार गुना हो गई है। उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू से भी मुलाकात की थी और विशाखापत्तनम में उबर के उत्कृष्टता केंद्र का विस्तार करने की कंपनी की योजना साझा की थी।


