प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोम में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) मुख्यालय में आयोजित समारोह में एग्रीकोला पदक से सम्मानित किया गया। एफएओ के महानिदेशक डॉ. क्यू डोंगयू ने प्रधानमंत्री को यह पदक सौंपा। यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और उनके योगदान को मान्यता देने के लिए दिया गया। इसमें भारत में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा मजबूत करने और ग्रामीण विकास से जुड़ी प्रमुख पहलों को शामिल किया गया है। विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को यह जानकारी दी।

सम्मान पर पीएम मोदी ने क्या कहा?
एफएओ एग्रीकोला पदक सम्मान समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, पिछले 10 वर्षों में लगभग 3000 जलवायु-अनुकूल फसल किस्में विकसित की गई हैं। देश के करोड़ों किसान इसका लाभ उठा रहे हैं। हमारा मानना है कि खेती का भविष्य केवल ‘ज्यादा उत्पादन’ में नहीं, बल्कि ‘बेहतर उत्पादन’ में है। इसी सोच के साथ जैव विविधता बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया जा रहा है। भारत का अनुभव दुनिया को दिखा रहा है कि बड़े स्तर पर काम और स्थिरता साथ-साथ चल सकते हैं। तकनीक और समावेशन एक-दूसरे को मजबूत कर सकते हैं। विज्ञान आधारित खेती वैश्विक खाद्य सुरक्षा की मजबूत नींव बन सकती है।
‘वैज्ञानिक खेती को दिया जा रहा बढ़ावा’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हजारों वर्षों की शिक्षा और कृषि परंपरा के साथ हमारा देश विज्ञान, तकनीक और नवाचार आधारित सोच के जरिये कृषि क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। हम केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि टिकाऊ, जलवायु-अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार खेती व्यवस्था बनाने पर भी काम कर रहे हैं। इसलिए पूरे भारत में मिशन मोड में वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के जरिये किसानों को मिट्टी की वैज्ञानिक जांच और पोषक तत्वों के आधार पर सलाह दी जा रही है। ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (हर बूंद से ज्यादा फसल), माइक्रो इरिगेशन (सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली) और प्रिसिजन फार्मिंग (सटीक खेती या आधुनिक तकनीक आधारित खेती) जैसे अभियानों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि कम पानी में ज्यादा फसल का उत्पादन किया जा सके।
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‘भारत में कृषि जीवन की मुख्यधारा’
उन्होंने कहा, भारतीय संस्कृति में कृषि केवल फसल उगाने का माध्यम नहीं है। इसे इंसान और धरती माता के बीच गहरे और पवित्र रिश्ते का दर्जा दिया गया है। भारत में कृषि जीवन की मुख्यधारा है। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा और जीवन मूल्यों का प्रतिबिंब है। हम धरती को ‘मां’ कहते हैं और किसानों को ‘धरती पुत्र’। हजारों साल पुराने यही मूल्य आज भी हमारे प्रयासों की प्रेरणा हैं।
अन्नदाताओं को समर्पित किया सम्मान
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, भव्य स्वागत और एग्रीकोला पदक से सम्मानित करने के लिए मैं एफएओ के महानिदेशक का दिल से आभार व्यक्त करता हूं। भारत के लिए उनके मित्रतापूर्ण शब्दों और एफएओ में वर्षों के योगदान के लिए मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। यह सिर्फ मेरा सम्मान नहीं, बल्कि भारत के करोड़ों किसानों, पशुपालकों, मछली पालकों, कृषि वैज्ञानिकों और श्रमिकों का सम्मान है। यह भारत की उस प्रतिबद्धता का भी सम्मान है, जिसके केंद्र में मानव कल्याण, खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ विकास है। मैं इस मेडल को विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं और इसे भारत के अन्नदाताओं को समर्पित करता हूं।
