अगर आप लाइफ, हेल्थ या जनरल इंश्योरेंस खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके काम की है. बीमा सेक्टर में कमीशन और कंपनियों के खर्च को लेकर भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने नए बदलावों का प्रस्ताव पेश किए हैं. इस प्रस्ताव का खास मकसद बीमा कंपनियों और एजेंटों व डिस्ट्रीब्यूटर्स को मिलने वाले कमीशन को कंट्रोल करना और पॉलिसी की बिक्री को ज्यादा पारदर्शी बनाना है.
दरअसल, IRDAI ने 23 सितंबर 2026 को जारी कंसल्टेशन पेपर में बीमा कंपनियों के Expenses of Management (EoM) से जुड़े नियमों को धीरे-धीरे कम करने का प्रस्ताव दिया है. इसके साथ ही उन्होंने अलग-अलग बीमा उत्पादों और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल के हिसाब से कमीशन की अधिकतम सीमा तय करने की भी बात कही है.
कमीशन को लेकर क्या है नया प्रस्ताव?
इस नए प्रस्ताव के मुताबिक, डिस्ट्रीब्यूटर को दिया गया पेमेंट चाहे कमीशन, इनाम, इंसेंटिव या किसी अन्य नाम से हो, उसे कमीशन में शामिल किया जाएगा. सामान्य बीमा कंपनियों के लिए मौजूदा 30% की सीमा को दो साल में घटकर 25% तक करने का प्रस्ताव है. पांच साल की अवधि में यह सीमा 20% तक लाई जा सकती है.
IRDAI ने सिर्फ कमीशन ही नहीं, बल्कि बीमा कंपनियों के मैनेजमेंट खर्च को भी कम करने का प्रस्ताव दिया है. जीवन बीमा कंपनियों के लिए EoM सीमा को दो साल में 15% और पांच साल में 12.5% तक लाने का प्रस्ताव है.
कमीशन में हर तरह का भुगतान होगा शामिल
नए प्रस्ताव में सिर्फ सीधे दिए जाने वाले कमीशन को ही नहीं, बल्कि डिस्ट्रीब्यूटर को मिलने वाले दूसरे फायदे भी कमीशन में शामिल करने की बात कही गई है.
- नकद भुगतान
- गिफ्ट और इंसेंटिव
- ब्रांड या मार्केटिंग से जुड़ा सपोर्ट
- डिस्ट्रीब्यूटर को दिए जाने वाले अन्य वित्तीय लाभ
ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो बीमा कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर के करच और कमीशन पर ज्यादा नियंत्रण हो सकता है. IRDAI के मुताबिक EoM में कमी से बीमा की कुल लागत कम करने में मदद मिल सकती है. इसका असर आगे चलकर पॉलिसी की कीमतों और ग्राहकों को मिलने वाले लाभ पर पड़ने की उम्मीद है. हालांकि, किसी पॉलिसी का प्रीमियम वास्तव में कितना कम होगा, यह अभी तय नहीं है.
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