लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

Word Longest Oil Pipeline: कैसे काम करती है दुनिया की सबसे बड़ी तेल पाइपलाइन, यह किन-किन देशों से गुजरती है?

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

Word Longest Crude Oil Pipeline: दुनिया की सबसे लंबी तेल पाइपलाइन एक विशाल औद्योगिक नेटवर्क की तरह काम करती है, जो हजारों किलोमीटर तक फैली हुई है. इस पाइपलाइन की बात करें तो यह ऊबड़-खाबड़ इलाकों और कई देशों की सीमाओं को पार करते हुए हर दिन करोड़ों बैरल कच्चा तेल एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाती है. इसे 1990 के दशक की बेहतरीन इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक माना जाता है. 

कौन सी है दुनिया की सबसे लंबी तेल पाइपलाइन?

दुनिया की सबसे लंबी तेल पाइपलाइन की बात करें तो क्रॉस-कंट्री तेल पाइपलाइन रूस की द्रुजबा पाइपलाइन है. इसे Friendship Pipeline भी कहा जाता है. ये पाइपलाइन रूस से शुरू होकर कई देशों से गुजरते हुए मध्य और उत्तरी यूरोप तक जाती है. यह वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का एक जरूरी हिस्सा मानी जाती है.

 बैंक में कितने दिन में क्लियर होता है चेक? इसके लिए क्या हैं RBI के नियम, जान लीजिए

आखिर किन देशों से गुजरती है पाइपलाइन?

द्रुजबा पाइपलाइन रूस के अल्मेत्येव्स्क से शुरू होती है और फिर कई देशों से होकर गुजरती है. ये पाइपलाइन खासकर इन देशों को जोड़ती है जैसे…

  • रूस
  • बेलारूस
  • पोलैंड
  • जर्मनी
  • यूक्रेन
  • हंगरी
  • स्लोवाकिया
  • चेक गणराज्य

साथ ही इसका नेटवर्क यूरोप के बड़े हिस्से को तेल सप्लाई करता है.

कितनी लंबी है द्रुज़बा पाइपलाइन?

  • इसके मुख्य ट्रंक लाइन करीब 4 हजार किमी.
  • वहीं पूरे नेटवर्क ( ब्रांच सहित) करीब 5500 किमी.

ये पाइपलाइन रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल ट्रांसपोर्ट करने की क्षमता रखती है.

दुनिया की अन्य लंबी तेल पाइपलाइनें

द्रुजबा के अलावा भी दुनिया में कई लंबी पाइपलाइनें हैं जैसे…

  • ESPO Pipeline (रूस से एशिया) – 4,850 किमी
  • Keystone Pipeline (कनाडा से USA) – 3,400 किमी
  • Kazakhstan–China Pipeline – 2,230 किमी
  • Baku–Tbilisi–Ceyhan Pipeline – 1,768 किमी

अब ये वाला टैक्स खत्म करने की तैयारी में सरकार! किसे और कैसे मिलेगा फायदा? जल्द लग सकती है मुहर

द्रुजबा पाइपलाइन की खास जानकारी

  • सबसे पहले यह रोजाना लगभग 1.2 से 1.4 मिलियन बैरल तेल ट्रांसपोर्ट कर सकती है.
  • इसके साथ ही ये 45 से ज्यादा बड़ी नदियों को पार करती है.
  • वहीं इसे 1960 से 1964 के बीच बनाया गया था.
  • इसका मकसद सोवियत देशों को सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा देना था.
  • यह आज भी यूरोप की ऊर्जा जरूरतों में जरूरी भूमिका निभाती है.

ऊर्जा सप्लाई में इसका महत्व क्या है?

द्रुजबा पाइपलाइन केवल एक तकनीकी प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का एक बड़ा हिस्सा है. हालांकि, समय के साथ इसमें कई बदलाव और रुकावटें भी आई हैं, लेकिन यह आज भी यूरोप के लिए कच्चे तेल की एक जरूरी लाइफलाइन बनी हुई है.

Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment